बाल वैज्ञानिकों की जिज्ञासा को किया शांत

मेरठ।  शास्त्रीनगर स्थित बालेराम ब्रजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर  विद्यालय में चल रहे 23 वें अखिल भारतीय विज्ञान मेले में विज्ञान वार्ता का आयोजन किया गया। विज्ञान वार्ता का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डा. लक्ष्मीकान्त वाजपेयी (राज्यसभा सांसद), मुख्य विज्ञान वार्ताकार डा. चन्द्र मोहन नौटियाल (वैज्ञानिक और विज्ञान संचारक), विशिष्ट अतिथि  प्रो. वाइ. विमला (कुलपति, सहारनपुर विवि), डा. दिव्या अग्रवाल (वैज्ञानिक, सी.एस.आई.आर. चण्डीगढ़) एवं  अशोक बेरी (अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। मंचासीन अतिथियों का परिचय श्री नगेन्द्र कुमार पाण्डेय जी (अखिल भारतीय विज्ञान संयोजक) ने कराया।

विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। विज्ञान वार्ता का शुभारम्भ डा. चन्द्र मोहन नौटियाल  ने बताया कि ब्रहमाण्ड, सौर मंडल और पृथ्वी का उद्धव और विकास एक जटिल और रोचक विषय है। ब्रहमाण्ड लगभग 13.8 अरब वर्ष पूर्व बिग बैंग नामक एक महाविस्फोट से उत्पन्न हुआ था। सौर मण्डल 4.6 अरब वर्ष पूर्व एक विशाल आणविक बादल से उत्पन्न हुआ था। साथ ही साथ उन्होंने बताया कि गुरुत्वाकर्षण के कारण बादल संकुचित हुआ और सूर्य तथा ग्रहों का निर्माण हुआ। 

विभिन्न प्रदेशों से आये हुए बाल वैज्ञानिकों ने डा. चन्द्र नौटियाल जी से विभिन्न प्रश्नों को पूछ कर अपनी जिज्ञासा शान्त की। जैसे जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई? ब्रहमाण्ड की उत्पत्ति कैसे हुई? ब्रहमाण्ड की आयु कितनी है? पृथ्वी पर वनस्पति के रूप बदलने का मुख्य कारण क्या है? मानव गतिविधियों का वनस्पति पर क्या प्रभाव पड़ता है? जीवाश्म क्या है और ये प्राचीन वनस्पति के बारे में जानकारी कैसे प्रदान करते हैं? जीवश्म वनस्पति के अध्ययन के लिए कौर सी तकनीकें उपयोग की जाती है? रेडियोंकार्बन विधि का उपयोग किस लिए किया जाता है? रेडियोकार्बन विधि किस सिद्धांत पर आधारित है? रेडियोकार्बन विधि का उपयोग करके निर्धारित आयु का कैसे पता लगाया जाता है? उन्होंने सभी प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देकर उनका ज्ञानवर्धन किया। कार्यक्रम में देश भर से आये सभी बाल वैज्ञानिकों ने भरपूर आनन्द लिया। विशिष्ट अतिथि श्रीमती प्रो. वाई. विमला ने कहा कि हर व्यक्ति में एक वैज्ञानिक छिपा होता है। वह किसी न किसी वैज्ञानिक प्रतिभा का धनी होता है, आवश्यकता है मात्र उसे परखने की और जीवन में प्रभावी रूप से लागू करने की।

मुख्य वक्ता डा. दिव्या अग्रवाल ने प्रतिभागियों को पढ़ाई के साथ-साथ वैज्ञानिक गतिविधियों में बढ़ चढ़कर भाग लेने के लिये प्रेरित किया और जलवायु परिवर्तन का वनस्पति पर क्या प्रभाव पड़ता है आदि के विषय में समझाया।

अन्य विशिष्ट अतिथि श्री अशोक बेरी ने कहा कि विज्ञान केवल गन्तव्य ही नहीं बल्कि निरन्तर खोज है। उन्होंने विज्ञान मेले की प्रशंसा करते हुए विद्यार्थियों को अपने वैज्ञानिक कौशल का विकास कर समाज व देश की प्रगति में योगदान करने के लिये प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन जगवीर शर्मा (सम्भाग निरीक्षक) ने किया। इस अवसर पर  गोविन्द महन्त (अखिल भारतीय संगठन मंत्री, विद्या भारती),  रविन्द्र कान्हरे (राष्ट्रीय अध्यक्ष, विद्या भारती), कमल किशोर सिन्हा (अखिल भारतीय मंत्री, विद्या भारती), प्रान्तीय संगठन मंत्री श्री प्रदीप गुप्ता, प्रबन्ध समिति के पदाधिकारी  मनमोहन गुप्ता, डा. विनोद कुमार अग्रवाल, डा. आशीष अग्रवाल, डा. सुधांशु अग्रवाल, अश्वनि गुप्ता (उद्योपति), अरूण जिंदल, सीमा गोयल, गीता अग्रवाल, सीमा श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

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