बच्चों की मौत दुर्भाग्यपूर्ण
राजीव त्यागी
कफ सिरप के कारण बच्चों की मौतें काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से दवा फैक्टरियों की जांच में कोई ढिलाई न बरतने को कहा है। साथ ही, देश के हर जिले में औषधि नियंत्रक अधिकारी दवा निर्माण इकाइयों का निरीक्षण करेंगे। यदि ऐसी फैक्टरियां संशोधित शेड्यूल एम अधिनियम के तहत तय मानकों पर खरी नहीं उतरी, तो उनके लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे। सही बात है दवा फैक्टरियों की सख्ती से जांच होनी ही चाहिए। खांसी की दवाओं के इस्तेमाल से हुई बच्चों की मौत किसी दुर्भाग्य से कम नहीं। दरअसल यह जबरदस्ती का मामला है। ज्यादातर मामलों में बच्चों की खांसी और सर्दी-जुकाम अपने आप ठीक हो जाते हैं और इनके लिए दवाओं की जरूरत नहीं होती।
लेकिन इन दिनों देखा जा रहा है कि कुछ चिकित्सक मामूली इन्फेक्शन में भी अंधाधुंध दवाओं का प्रयोग कराते हैं। केवल दवा कंपनियों के दबाव में। इसके बजाय होना य़ह चाहिए कि बच्चों को कॉम्बिनेशन दवाएं और कफ सिरप देने के बजाय अभिभावकों को घरेलू नुस्खे अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। मध्य प्रदेश सरकार ने 'कोल्ड्रिफ कफ सिरप' की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। अधिकारियों ने बताया कि दवा के नमूनों में अत्यधिक जहरीला पदार्थ पाया गया है।
जिन बच्चों की मौत हुई है उनमें से दो छिंदवाड़ा शहर से, एक चौरई तहसील से और 11 परासिया उप-संभाग से थे। पुलिस अधीक्षक अजय पांडे के अनुसार श्रीसन फार्मास्युटिकल्स, कांचीपुरम (तमिलनाडु) द्वारा निर्मित कोल्ड्रिफ को परासिया में 11 बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। कंपनी और प्रवीण सोनी के खिलाफ परासिया पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है।
उन्होंने बताया कि सोनी सरकारी चिकित्सक होने के बावजूद एक निजी क्लिनिक चलाते थे और उन्होंने सिरप लेने का परामर्श दिया था। प्रदेशों और केन्द्र की सरकार को जांच में देरी के कारणों को ढूंढकर तत्काल रूप से दूर करना चाहिए जिन परिवारों के मासूम बच्चों की कफ सिरिप लेने से मौत हुई है उन परिवारों के दर्द को शब्दों में बयान करना मुश्किल है।




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