शोध किसी भी शैक्षणिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला- प्रो रविन्द्र कुमार 

पांच  दिवसीय राष्ट्रीय अल्पावधि पाठ्यक्रम का शुभारम्भ

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में  बुधवार को  पाँच दिवसीय राष्ट्रीय अल्पावधि पाठ्यक्रम (National Short-Term Course) का शुभारम्भ हुआ। यह पाठ्यक्रम शोध पद्धति (Research Methodology) विषय पर केंद्रित है, जिसका आयोजन विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसन्धान संस्थान (NITTTR), चंडीगढ़ द्वारा पूर्ण रूप से प्रायोजित (sponsored) किया गया है।

कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति श्रीमती संगीता शुक्ला, शोध निदेशक प्रो. बीर पाल सिंह, कार्यक्रम समन्वयक एवं शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. ए. बी. गुप्ता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो. प्रमोद कुमार मेहरा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो. मनोज कुमार, विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. रविन्द्र कुमार, तथा विभाग की प्रख्यात संकाय सदस्याएँ—डॉ. विजेता गौतम, डॉ. भावना सिंह, डॉ. निधि गुप्ता और डॉ. वर्षा—विशिष्ट गरिमामयी उपस्थिति में मंच पर आसीन रहे।

सत्र का संचालन शोधार्थी अनंदिता दास एवं आशीष विमल ने किया। कार्यक्रम संयोजक प्रो. रविन्द्र कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पाठ्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज शोध किसी भी शैक्षणिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला है, और शोध पद्धति को समझना शोधार्थियों की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसके उपरांत विश्वविद्यालय की कुलपति संगीता शुक्ला ने अपने उद्घाटन संबोधन में शोध पद्धति की प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने शोध नैतिकता (Research Ethics), सत्यनिष्ठा (Integrity) और साहित्यिक चोरी (Plagiarism) जैसे गंभीर मुद्दों पर शोधार्थियों को विशेष सतर्कता बरतने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शोध केवल अकादमिक आवश्यकता नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय योगदान है।

डॉ. विजेता गौतम ने अल्पावधि पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि शोध विभाग और शोधार्थी एक-दूसरे के पूरक हैं। शोधार्थी ही विभाग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में निरंतर योगदान देते हैं।

प्रो. ए. बी. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि शोध प्रविधि (Research Methodology) को समझना और आत्मसात करना ही एक सफल शोधार्थी की पहचान है। उनके अनुसार शोधार्थी को सदैव प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति विकसित करनी चाहिए क्योंकि जिज्ञासा ही खोज और ज्ञान की पहली सीढ़ी है। प्रो. बीर पाल सिंह ने अंग्रेजी विभाग को इस आयोजन हेतु धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विश्वविद्यालय की हाल की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने NIRF 2025 रैंकिंग में 41वीं रैंक हासिल की है तथा बौद्धिक सम्पदा सूचकांक 2023 में 4वीं रैंक प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रो. प्रमोद कुमार मेहरा ने प्रथम तकनीकी सत्र (Technical Session) में साहित्यिक सर्वेक्षण (Literature Review) की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि साहित्यिक सर्वेक्षण केवल पूर्ववर्ती शोध का संकलन नहीं, बल्कि एक शोधार्थी की बौद्धिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण का दर्पण है। प्रो. मनोज कुमार ने अपने व्याख्यान में साहित्यिक सर्वेक्षण की चरणबद्ध प्रक्रिया (Step-by-step process) समझाते हुए अनेक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने शोधार्थियों को यह संदेश दिया कि व्यवस्थित और गहन साहित्यिक सर्वेक्षण से ही किसी शोध का आधार मजबूत होता है। पहले दिन के सत्र का समापन डॉ. विजेता गौतम द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

शोध पद्धति की महत्ता पर विमर्श

इस पाँच दिवसीय पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों और शिक्षकों को शोध की बुनियादी एवं उन्नत विधियों से अवगत कराना है। वर्तमान समय में जहाँ ज्ञान-आधारित समाज का निर्माण हो रहा है, वहाँ शोध की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इस प्रकार के प्रशिक्षण शोधार्थियों को न केवल शोध की दिशा दिखाते हैं बल्कि उन्हें नैतिकता, मौलिकता और समाजोपयोगिता से भी जोड़ते हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत बना रहा है।

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