शोभित विवि के पहले बैच का दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम ‘डिस्कवर यू’ संपन्न
मेरठ। शोभित विवि में आयोजित ‘डिस्कवर यू’ ओरिएंटेशन कार्यक्रम ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को न सिर्फ ज्ञान और सीख का अवसर प्रदान किया, बल्कि उत्साह, आनंद और आत्म-खोज का एक यादगार अनुभव भी दिया। इस दो दिवसीय आयोजन में विद्यार्थियों ने अकादमिक मार्गदर्शन के साथ-साथ प्रेरणादायी व्याख्यानों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से सीखने और आनंद लेने का अनूठा संगम अनुभव किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुँवर शेखर विजेन्द्र ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा – “‘डिस्कवर यू’ का वास्तविक अर्थ है स्वयं को पहचानना। अपनी क्षमताओं, रुचियों और सीमाओं को समझना ही सफलता की पहली सीढ़ी है। जब तक हम स्वयं को नहीं पहचानते, तब तक अपनी ऊर्जा और सामर्थ्य का सही उपयोग संभव नहीं है। विश्वविद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, दृष्टिकोण विकास और जीवन-दर्शन के परिष्कार का माध्यम है। शिक्षा का उद्देश्य रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें बेहतर इंसान, जिम्मेदार नागरिक और समाज का संवेदनशील अंग बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। हर विद्यार्थी में अपार संभावनाएँ छिपी हुई हैं, और हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें पहचानकर सही दिशा दें।”
कुलपति प्रो. (डॉ.) वि. के. त्यागी ने कहा कि शोभित विश्वविद्यालय सदैव से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय के सलाहकार प्रो. (डॉ.) एम. एल. सिंगला ने विद्यार्थियों को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उद्योग विशेषज्ञ गुरप्रीत सिंह ने विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक माँगों और अपेक्षाओं से अवगत कराते हुए कहा कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है; व्यावहारिक कौशल, समस्या-समाधान क्षमता और टीम वर्क ही सफलता की कुंजी हैं।
सेवानिवृत्त कर्नल संजीत सिरोही ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सफलता की कहानी स्वयं लिखनी चाहिए। आत्म-अनुशासन, साहस और निरंतर प्रयास से ही जीवन के हर क्षेत्र में सफलता संभव है।इमेज कंसल्टेंट सुश्री मदीहा साह रसूल ने विद्यार्थियों को व्यक्तिगत ब्रांडिंग, उद्देश्यपूर्ण जीवन और प्रभावी संचार कौशल की महत्ता समझाई।
विश्वविद्यालय के सीनियर एच.आर. डायरेक्टर प्रो. देवेंद्र नारायण ने इंडस्ट्री 5.0 की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्य की कार्यसंस्कृति तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के संतुलन से निर्मित होगी। उन्होंने निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को आज की सबसे बड़ी ताकत बताया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक न्यू इनिशिएटिव्स श्री वंश शेखर ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. अभिषेक कुमार डबास ने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट गतिविधियों का परिचय दिया और विद्यार्थियों को उद्योगोन्मुखी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के समापन पर भव्य संगीत संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें “डिस्टॉर्शन बैंड” की ऊर्जावान प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गीत-संगीत और उल्लास से सराबोर इस शाम ने पूरे आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।इन दो दिनों में 12 राज्यों से आए विद्यार्थियों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं और आत्म-खोज की नई राह पर कदम बढ़ाए।इस सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों का विशेष योगदान सराहनीय रहा।



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