बढ़ती आबादी के साथ शहरीकरण के विकास में जरूरी है वहनीय विकास: आशीष जैन

 ग्रीन बिल्डिंग निर्माण है समय की आवश्यकता पर व्याख्यान का आयोजन 

मेरठ। मेरठ कॉलेज के डॉ रामकुमार गुप्ता में सभागार में   इंडियन सोसाइटी ऑफ हीटिंग, रेफ्रिजरेटिंग एंड एयर कंडीशनिंग इंजीनियर्स (आई.एस.एच.आर.ए.ई.) के अध्यक्ष देवेंद्र मोहन के नेतृत्व में आशीष कुमार जैन द्वारा “डिकोडिंग ग्रीन बिल्डिंग: इवोल्यूशन एंड डायनामिक्स, इन्वेस्टमेंट और एक्स्ट्रा कॉस्ट” (ग्रीन बिल्डिंग को समझना: विकास और गतिशीलता, निवेश या अतिरिक्त लागत) जैसे महत्वपूर्ण विषय पर एक व्याख्यान दिया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में  कॉलेज के मंत्री  विवेक कुमार गर्ग एवं प्राचार्य प्रो युद्धवीर सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर सभी का स्वागत किया। 
कार्यक्रम के प्रारंभ में  देवेंद्र मोहन ने सभागार को बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य हरित भवन पद्धतियों के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों पर प्रकाश डालना है, और इस आम धारणा को दूर करना है कि ये केवल एक अतिरिक्त लागत हैं, न कि एक दीर्घकालिक निवेश।  विवेक कुमार गर्ग ने बताया कि 22 वर्षों से अधिक के व्यापक अनुभव के साथ,  आशीष जैन स्थिरता के क्षेत्र में एक मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ हैं। उनकी विशेषज्ञता टिकाऊ डिजाइन, नेट जीरो बिल्डिंग, बीआईएम (बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग) और ग्रीन बिल्डिंग व्यवसाय रणनीतियों तक फैली हुई है। व्याख्यान के दौरान, जैन ने ग्रीन बिल्डिंग से संबंधित परिचालन लागत में कमी, बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादकता, और उच्च पुनर्विक्रय मूल्य जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।दिल्ली से पधारे  आशीष जैन ने बताया कि जैसा आप सभी जानते हैं, इस सभागार में आज का विषय ग्रीन बिल्डिंग है। ग्रीन बिल्डिंग केवल दीवार पर ग्रीन पेंट कर देना या कुछ हरे पौधे लगा देना नहीं है। न ही ग्रीन बिल्डिंग का स्वरूप कोई आवासीय, वाणिज्यिक, शैक्षिक या औद्योगिक भवन तक सीमित है। यह ऐसा विषय है जिससे हम न केवल अपने रहन-सहन में ऊर्जा की खपत कम कर सकते हैं बल्कि अपने जीवन में सुखद अनुभव की परिकल्पना भी कर सकते हैं। इसलिए समय की आवश्यकता है कि हम मेरठ शहर को एक ग्रीन बिल्डिंग के रूप में अनुभव करें और सभी के संयुक्त प्रयास से नई तकनीक को समझते हुए शहर के स्थापत्य में ग्रीन बिल्डिंग के टेक्निकल पहलुओं को जगह दें ताकि पर्यावरण के साथ-साथ शहर एवं भावनाओं का विकास भी समुचित तरीके से हो। कार्यक्रम को सफल बनाने में  प्रो मनोज सिवाच, आर्किटेक्ट श्री अशोक गर्ग, श्री जागेश कुमार, असित गुप्ता, संदीप कुमार, घनश्याम, अमित, दीपक इत्यादि का विशिष्ट सहयोग रहा।

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