15 जिलों की ट्रेजरी से पूछा किसके नाम थे स्टांप पेपर

संदिग्ध 997 बैनामों में शामिल प्रत्येक स्टांप के क्रेता का मांगा नाम

कानपुर ट्रेजरी की रिपोर्ट के बाद प्रदेश के 15 जनपदो तक फैली जांच

 मेरठ। मेरठ में हुए साढ़े सात करोड़ के स्टांप घोटाले की जांच की आंच प्रदेश के 15 जनपदों तक फैल गई है। घोटाले में शामिल 997 संदिग्ध बैनामों में प्रयोग हुए स्टांप पेपरों को लेकर कानपुर ट्रेजरी से रिपोर्ट मिली है। जिसके मुताविक उक्त स्टांप प्रदेश के 15 जनपदों को जारी किए गए थे। अब इन सभी जनपदों की ट्रेजरी से उन लोगों के नाम पते और मोबाइल नंबर मांगे हैं जिन्हें ये जारी हुए हैं। इसके बाद उन लोगों से संपर्क करके वह दस्तावेज मांगा जाएगा जिसमें उक्त स्टांप पेपर को प्रयोग किया गया है।

मेरठ में स्टांप घोटाला वर्ष 2023 में सामने आया लेकिन इसकी जांच नें पिछले कुछ महीनों में तेजी पकड़ी है। कुल 997 बैनामों में संदिग्ध स्टांप पेपर लगाकर साढ़े सात करोड़ से ज्यादा राशि की चपत सरकार को लगाई गई। विरोध बढ़ा तो पुलिस ने मुख्य आरोपित विशाल वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। अब वह जेल में है। विधानसभा की प्राक्कलन समिति भी इस मामले में जांच कर रही है।

2009 से 2014 के बीच के प्रदेश में जनपदों की ट्रेजरी को स्टांप पेपर का वितरण कान्पुर ट्रेजरी से किया जाता है. जिला प्रशासन की माग पर कानपुर ट्रेजरी ने इन सभी 997 बैनामों में प्रयोग किए गए स्टांप पेपर के संबंध में बताया गया है कि उक्त स्टांप पेपर 15 जनपदों को जारी किए गए. जिसमें से अधिकांश गाजियाबाद के है. बड़ी संख्या में स्टांप वर्ष 2009 से लेकर 2014 के बीच जारी हुए. इस रिपोर्ट में 452 बैनामों में इस्तेमाल किए गए 1500 से ज्यादा स्टांप पेपर का विवरण है।प्रदेश के सभी जनपदों में वर्ष 2015 से 2020 के बीच हुए बैनामों की भी जांच कराई जा रही है। इन बैनामों में प्रयोग किए गए कुछ स्टांप पेपर को जांच के लिए नासिक प्रेस भी भेजा गया है।

जिला प्रशासन ने अब मेरठ समेत सभी 15 जनपदों की ट्रेजरी को पत्र भेजकर उन लोगों के नाम, पते और मोबाइल नंबर की मांग की है जिन्हें उक्त स्टांप पेपर बिक्री किए गए हैं। इसके बाद उक्त लोगों से संपर्क करके वह दस्तावेज (बैनामा, एग्रीमेंट) मांगा जाएगा जिसमें उक्त स्टांप पेपर को उन्होंने इस्तेमाल किया। यदि सभी स्टांप मिल जाते हैं तो स्पष्ट हो जाएगा कि मेरठ के बैनामों में लगे स्टांप फर्जी हैं। यदि नहीं मिलते हैं तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उक्त स्टांप पेपर का दूसरी बार इस्तेमाल किया गया है। नियमानुसार स्टांप पेपर को उसी जनपद में उसी व्यक्ति के बैनामें में प्रयोग किया जा सकता है जिसे वह जारी किया गया है।कानपुर ट्रेजरी से रिपोर्ट प्राप्त हुई है।

 बोले अधिकारी 

 अब उन सभी जनपदों की ट्रेजरी को पत्र भेजकर उक्त स्टांप पेपर की खरीद करने वाले लोगों के नाम पते और दिनांक की जानकारी मांगीगई है-डॉ. विजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी

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