हम अपना इतिहास भूल बैठेंगे तो बिना चरित्र के हो जाएंगे - डॉ. अतुल कृष्ण
जय हिंद का नारा हमें भारतवासी होने का एहसास कराता है, इसे आपस में अभिवादन के रूप में प्रयोग करें देशवासी
मेरठ। अभिनव ट्रस्ट की उन्मुक्त भारत इकाई ने चरित्र शाला राम सहाय इंटर कॉलेज गढ़ रोड मेरठ पर आयोजित की। इस चरित्र शाला में कक्षा 9, 10, 11 व 12 के विद्यार्थियों ने भाग लिया। मुख्य वक्ता सुभारती समूह के संस्थापक डॉक्टर अतुल कृष्ण ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जो आदत या संस्कार बचपन में पड़ जाते हैं, वह सारी जिंदगी व्यक्ति में रहते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के शहीदी दिवस पर हमें यह पंक्तियां याद रखनी चाहिए- ‘देह शिवा वर मोहे इहे, शुभ करमन ते कबहु ना टरु‘, न डरूं अरि से जब जाए लरूं, निश्चय कर अपनी जीत करूं‘। इसका मतलब है कि हमको अच्छे कामों से कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए और शत्रु से इस प्रकार युद्ध करना चाहिए कि जीत हासिल हो। यह पंक्तियां हमारे चरित्र को बनाने में एक भूमिका निभाती हैं। उन्होंने जय हिंद की विशेषता बताते हुए कहा की जय हिंद नारा हमें भारतवासी हैं होने का एहसास कराता है। जय हिंद नारे ने हमें आजादी दिलवाने में अहम भूमिका निभाई थी। यह नारा आज भारतीय सेना व पुलिस फोर्स आदि में अभिवादन के रूप में प्रयोग किया जाता है और वहीं सुभारती विश्वविद्यालय में आपस में अभिवादन के समय और विद्यार्थी उपस्थिती देते समय जय हिंद का प्रयोग करते है।
आप भी अपने विधालय में जय हिंद का प्रयोग कर सकतें है। जब हमारे अनुशासित फोर्स इस जय हिंद के अभिवादन को स्वीकार किए हुए हैं तो हमें आपस में मिलते समय जय हिंद का अभिवादन करना चाहिए जिससे हमें एहसास होगा कि हम हिंद के वासी हैं और हिंद हमारा हमेशा विजयी रहे। जय हिंद का नारा ही एक ऐसा नारा है जो सारे भारतवासियों को आपस में जोड़ता है और एक सामूहिक चरित्र का निर्माण भी करता है। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर अतुल कृष्ण ने कहा वंदे मातरम आजादी के दीवानों का गीत होता था जिसे बोलने से अंग्रेज सरकार हिल जाती थी यह गीत सबको एकत्र करने का माध्यम भी था। आज यह हमारा राष्ट्रीय गीत है। चरित्र शाला में भाग लेने वाले समस्त विद्यार्थियों अध्यापकों और आगुंतकों ने वंदे मातरम पूरे लय से गाया। आगे विचार रखते हुए डॉक्टर अतुल कृष्ण ने कहा यदि हम अपना इतिहास भूल बैठेंगे तो हम बिना चरित्र के हो जाएंगे तो चरित्र निर्माण में अपना गौरवमयी इतिहास याद रखना भी जरूरी है। आज दुर्गा भाभी का जन्मदिन भी है जिन्होंने भगत सिंह की पत्नी बनने का नाटक कर भगत सिंह को अंग्रेजों की पकड़ से बचाया था। चरित्र शाला में उन्होंने कहा जो समाज के लिए अच्छा काम है,वही चरित्र है। उन्होंने विद्यार्थियों को चर्तुशील अपनाने का मंत्र भी दिया और कहा सत्य, अहिंसा, असत्ये व नशा न करना। चार बातों को अपने जीवन में विद्यार्थियों को अपनाना बहुत आवश्यक है जिससे विद्यार्थी मन और तन दोनों से शक्तिशाली बनेंगे। अंत में डॉक्टर अतुल कृष्ण ने जीवन को समन्वय पूर्वक जीने की भी सलाह दी और उन्होंने कहा के समन्वय जीवन का आधार होता है जो संतुलित व्यक्ति है वह हर जगह कामयाब रहता है। अन्य वक्ताओं में विद्यालय के मैनेजर रजनीश त्यागी, संघ के अधिकारी विनोद भारती, संजय कंसल विद्यालय के प्रधानाचार्य सुखनंदन त्यागी ने भी अपने विचार चरित्र शाला में रखें। कार्यक्रम में ए.के. कौशिक, परवेज बशीर, पाण्डेय जी, जयसिंह, अनिल अज्ञात और शिक्षकों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का समापन अखण्ड भारत के राष्ट्रगान ‘शुभ सुख चैन की बरखा बरसे‘ के साथ हुआ।अंत में राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम,के नारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


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