बेहतर स्थिति के संकेत
इजमा अजीम
जाहिर तौर पर एक नया ध्रुव बनकर उभर रहा भारत किसी भी अन्य ताकतवर देश की नाराजगी मोल लेने की हिम्मत रखता है। शीतयुद्ध के दौर में दो ध्रुवीय विश्व व्यवस्था के बाद एक ध्रुवीय व्यवस्था का अनुभव दुनिया को मिल चुका है। अब बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में ही संभावनाएं देखी जा रही हैं। ग्लोबल साउथ की आवाज बन भारत वैश्विक भूमिका को खुलकर प्रदर्शित भी कर रहा है। वैसे भी भारत एक बड़े देश के पाले में कभी नहीं रहा। अमरीका या अन्य नए देशों से दोस्ती का यह मतलब नहीं है कि अपने पुराने साथियों से दूर हो जाएं। इजरायल और फिलिस्तीन के मामले में भी यह देखा जा सकता है। इजरायल से नई दोस्ती के बावजूद फिलिस्तीन पर हमारा स्टैंड नहीं बदला है। उसी तरह रूस से अच्छे संबंध का यह मतलब नहीं कि यूक्रेन के मामले में उसे क्लीन चिट दे दें। यही वजह है कि राष्ट्रपति पुतिन को मोदी ने शांति का पाठ पढ़ाने में कोई हिचक नहीं दिखाई। भारत की इस भूमिका के बीच अब अमरीका भी यह कहने में संकोच नहीं कर रहा है कि भारत को यूक्रेन युद्ध रोकने की पहल करनी चाहिए। फिलहाल शांति के पक्षधर अन्य देश भारत के साथ मिलकर रास्ता खोजने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रिया का रूस और यूक्रेन के बीच संभावित समझौता वार्ता का मंच बनने की इच्छा जाहिर करना यही बताता है। बहरहाल, वैश्विक राजनीति से इतर भारत और रूस के बीच हुई 22वीं द्विपक्षीय बैठक में नए समझौते काफी अहम हैं। दोनों देशों के बीच का व्यापार 2030 तक 65 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक करने पर भी सहमति बनी है। यह भारत-रूस के विशेष रिश्ते को और मजबूत करने वाले होंगे।


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