श्री राम के नाम पर रखा गया था सूरीनाम देश का नाम
- आईआईएमटी विश्वविद्यालय पहुंचे सूरीनाम के राजदूत अरुण कुमार हरद्येन ने भारत के साथ प्रगाढ़ रिश्तों को बताया
मेरठ। 1975 में आजाद हुए सूरीनाम का नाम श्री राम के नाम पर ही रखा गया था और सूरीनाम पर भारत और भारतीयों का काफी प्रभाव है। आईआईएमटी विश्वविद्यालय पहुंचे सूरीनाम के राजदूत अरुण कुमार हरद्येन ने छात्रों से मुलाकात करते हुए सूरीनाम के इतिहास और भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में बातचीत की।
शुक्रवार को आईआईएमटी विश्वविद्यालय पहुंचे दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित देश सूरीनाम के राजदूत अरुण कुमार हरद्येन व कमर्शियल अधिकारी संध्या कुमारी मांग्रे का आईआईएमटी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ0 दीपा शर्मा व कुलसचिव डॉ. वी.पी.राकेश ने स्वागत किया। विश्वविद्यालय भ्रमण के दौरान राजदूत महोदय ने आईआईएमटी विश्वविद्यालय के हरित और शैक्षिक वातावरण की प्रशंसा की।
आईआईएमटी विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे राजदूत का स्वागत निदेशक प्रशासन डॉ0 संदीप कुमार व कमर्शियल अधिकारी संध्या कुमारी मांग्रे का स्वागत रेडियो डायरेक्टर डॉ. सुगंधा श्रोतिया ने किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं श्वेता रस्तोगी ने राजदूत महोदय का जीवन परिचय दिया।
छात्रों को संबोधित करते हुए सूरीनाम के राजदूत अरुण कुमार हरद्येन ने बताया की सूरीनाम में 27 फीसदी आबादी भी भारतीयों की ही है। यही वजह है कि सूरीनाम में डच, अंग्रेजी के अलावा हिंदी भी बहुतायत से बोली जाती है। राजदूत अरुण कुमार ने बताया कि सूरीनाम एकमात्र देश है जो 94 प्रतिशत वर्षावनों से घिरा हुआ है। उन्होंने बताया कि अभी तक बाक्साइट की सुरंगें ही सूरीनाम की आय का मुख्य स्रोत रहा है। मगर अब गैस और ऑयल रिफाइनरी को आय के नए स्रोत के तौर पर देखा जा रहा है। लिहाजा भारत के साथ संबंधों को प्रगाड़ करने के अलावा सूरीनाम में ऑयल रिफाइनरी के एक्सपर्ट्स की मदद की जरुरत महसूस की जा रही है।
छात्रों को संबोधन के बाद राजदूत अरुण कुमार हरद्येन ने छात्रों और शिक्षकों के सवालों के जवाब भी दिए। इस अवसर पर एकेटीयू के डायरेक्टर डॉ संदीप माहेश्वरी, आईआईएमटी विश्वविद्यालय के डीन डॉ सतीश कुमार, डीन नवनीत शर्मा, डीन वरेन्द्र सिंह पटियाल, मीडिया प्रभारी सुनील शर्मा सहित सभी विभागों के शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।


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