प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 77815 प्रसव पूर्व जांच हुईं

प्रसव पूर्व जांच के मामले में जिले ने 109 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया

जिले में 80 प्रतिशत गर्भवती की पहली तिमाही में हुई प्रसव पूर्व जांच

- 70 प्रतिशत ने कराईं चार प्रसव पूर्व जांच, 4410 एचआरपी चिन्हित हुईं 

 

गाजियाबाद, 24 फरवरी, 2024मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए शुरू किया गया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) गर्भवती महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अभियान के दौरान गर्भवती को शारीरिक और मानसिक बदलावों की जानकारी देने के साथ ही खानपान को लेकर भी काउंसलिंग की जाती हैसाथ ही कैल्शियम और आयरन सप्लीमेंट क्यों जरूरी हैंयह भी बताया जाता है। गर्भकाल में महिला को अच्छे खानपान की जरूरत होती हैक्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु भी मां के शरीर से ही अपना पोषण प्राप्त करता है। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. भवतोष शंखधर ने बताया - अभियान के तहत हर माह एकनौ, 16 और 24 तारीख को प्रसव पूर्व जांच (एंटी नेटल केयर-एएनसी) की जाती है। जिसके अंतर्गत गर्भवती की पेशाब और रक्त की जांच के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है। जरूरत पड़ने पर गर्भवती को एएनसी के लिए एंबुलेंस सुविधा भी दी जाती है।

उन्होंने बताया - अप्रैल 2023 से अब तक पीएमएसएमए के अंतर्गत 77,815 एएनसी हुईं हैंजो निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 109 प्रतिशत हैं। सीएमओ ने अपील की है कि गर्भवती पीएमएसएमए का लाभ उठाएं। जरूरत पड़ने पर सरकार एंबुलेंस की सुविधा भी लें। गर्भवती को प्रसव के लिए ले जाना है तो एंबुलेंस के लिए 102 नंबर पर कॉल करें। प्रसव अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर कराएं। निजी क्षेत्र में जाना हो तो केवल प्रशिक्षित चिकित्सक की देखरेख में ही प्रसव कराएं। 

डिप्टी सीएमओ डा. रविंद्र कुमार ने बताया - पीएमएसएमए के अंतर्गत 63467 एएनसी पहली तिमाही में हुईंजो करीब 80 प्रतिशत है। पहली तिमाही में कम से कम एक एएनसी होनी आवश्यक होती है। गर्भवती को सलाह दी जाती है कि वह गर्भकाल के दौरान चार एएनसी कराएं ताकि म‌ां और बच्चे के स्वास्थ्य की नियमित रूप से मॉनिटरिंग होती रहे । जिले में 70 प्रतिशत गर्भवती ने गर्भकाल के दौरान चार एएनसी कराईं। एएनसी के दौरान जिले में कुल 4410 उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी)  चिन्हित की गईंयह छह प्रतिशत रही। पीएमएसएमए के दौरान एएनसी करने का उद्देश्य एचआरपी चिन्हित कर उनका समय से प्रबंधन करना है ताकि प्रसव के समय होने वाले खतरे से बचा जा सके।

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