अब हवाई बातें नहीं, मूल मुद्दे ही जीतेंगे

- कृष्ण कुमार निर्माण
कर्नाटक के चुनाव नतीजे आ चुके हैं। इससे पहले कि आगे बढ़ें, एक बार चुनाव प्रचार के दौरान की कुछ विशेष घटनाएं याद करना जरूरी है। जैसे कि भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी, गालियां तक भाजपा के बड़े नेता गिनवा चुके थे, विपक्ष के घोषणा पत्र को अपनी तरह से परिभाषित करते हुए बजरंग बली से जोड़ा गया, जो कि निहायत अनुचित था।उधर कांग्रेस भी कम नहीं रही मगर कांग्रेस के पास ले-देकर प्रियंका है, जो कर्नाटक के नाटक में अहम रोल निभाती दिखाई दी। वैसे खड़गे भी स्क्रीन पर निरंतर रहे।
भारत जोड़ो यात्रा निसंदेह कांग्रेस के लिए जरूर फायदे का सौदा रहा।निसंदेह कांग्रेस के नेताओं की भाषा उचित नहीं ठहराई जा सकती। मगर जिस ताम-झाम के साथ भाजपा चुनाव लड़ती है, हर बार,वो गजब का होता है। तमाम मंत्री, मुख्यमंत्री, खुद पीएम और एक बार उस रोड़-शो के दृश्य जेहन में घुमाइए और तमाम भाषणों को जेहन में रखिए।चूंकि नतीजे सामने हैं। और कांग्रेस की जीत साफ हो चुकी है। स्पष्ट बहुमत आ चुका है। तो क्या बकौल भाजपा नेता यह मान लिया जाए कि जो जीतता है, लोग उसकी नीतियों में विश्वास करते है।



मायने यह कि भाजपा की किसी भी बात पर, भाजपा के किसी नेता की बात पर और भाजपा की किसी नीति पर जनता ने भरोसा नहीं किया बल्कि माना ही नहीं। यहाँ वोट प्रतिशत का जिक्र छोड़ दीजिए। वैसे यह हार भाजपा को पूरे दक्षिण भारत से बाहर करती है और यह जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम करेगी, जिससे न केवल विपक्षी एकता मजबूत होगी बल्कि कांग्रेस का कद भी बढ़ेगा। मगर कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई कांग्रेस के लिए बड़ा खतरा भी साबित हो सकती है। जो कांग्रेस की जन्मजात लाइलाज बीमारी है।
मगर यह जीत इतना जरूर साफ तय कर रही है कि जिन गालियों को मुद्दा बनाया गया, उसे जनता ने नकार दिया, जिस बजरंग बली को मुद्दा बनाया गया, उसे तो कतई नकार दिया गया, हवाई बातें स्वीकार नहीं की गई, इस बात पर जनता ने मोहर लगा दी कि डबल इंजन की सरकार ने पिछले पांच साल में जमकर भ्रष्टाचार किया था। वैसे भी 2018 में कर्नाटक में भाजपा सबसे बड़ी बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी थी मगर सरकार कांग्रेस और जेडीएस ने बना ली थी मगर बाद में ऑपेरशन लोटस करके भाजपा सत्ता पर आसीन हो गई थी।
इस चुनाव ने फिर से सिद्ध कर दिया कि अगर ठीक से चुनाव लड़ा जाए तो भाजपा को हराया जा सकता है। यहीं यह बताते चले कि यदि 24 में विपक्ष ने भाजपा से सीधी लड़ाई बना ली तो भाजपा का सत्ता से बाहर होना निश्चित हो सकता है क्योंकि यह तय है कि जहाँ भी भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर होगी तब-तब भाजपा नुकसान में रहती है और कांग्रेस फायदे में रहती है। वैसे बजरंग बली ने अपनी गदा का जबरदस्त प्रहार उन लोगों पर जरूर किया है जो उनका नाम लेकर कट्टरता दिखाते हैं और हिंसा करते हैं।
दूसरे लव जेहाद के मसले नगण्य रहे। मसलन साफ बात इस जनादेश का मतलब यह रहा कि भावनात्मक मुद्दे ज्यादा दिन नहीं टिकेंगे और जो भी सत्ता में हो, उसे जनता के काम करके दिखाना होगा। साथ ही यह तय हो गया कि देर से ही सही, हर किसी को जनता के मूल मुद्दों पर ही चुनाव लड़ना होगा। वैसे इस जनादेश का यह अर्थ  लगाना शायद जल्दबाजी होगी कि लोकसभा में भी ऐसा होगा? यह देखना अभी बाकी है। लेकिन यह भी तय हो गया कि कांग्रेस  खत्म नहीं हुई है। जैसे-जैसे भाजपा के सत्ता के दिन बढ़ते जा रहे हैं, तैसे-तैसे उसका प्रभाव घट रहा है और मोदी जी, जिसे बाजी पलटने वाले माहिर नेता माना जाता है, वह भी इस काम में अब फेल होने लग गए हैं।
इस जनादेश का एक साफ संदेश यह भी है कि गालियों से बाहर आइए, धार्मिक मुद्दे छोड़िए, समाज को बांटने वाली सियासत छोड़नी होगी और यदि कोई भी पार्टी बिना किसी बात को उलझाए बिना शिद्दत से चुनाव लड़ेगी, तो भाजपा को हराया भी जा सकता है।  वैसे तथाकथित गोदी मीडिया को शब्द नहीं सूझ रहे,ऐसा क्यों होता है? यह भी विश्लेषण का विषय है और भाजपा प्रवक्ताओं भी बोलना सा भूल गए हैं क्योंकि कांग्रेस तो पहले से ही परेशान रहती है।
खैर, कर्नाटक के चुनावों पर बातचीत होती रहेगी क्योंकि निकट भविष्य में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में चुनाव होंगे, जो 24 की तस्वीर साफ कर देंगे। वैसे राम भक्त हुनमान की जय तो बनती है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts