मिथक तोड़ विवि की गुलिस्ता ने लिखी नई इबारत
.उर्दू विभाग से किया शोध, परिवार की पहली पीएचडी धारक बनने का पाया गौरवमेरठ। लिसाड़ीगेट अब बेटियों के कारण अपना मिथक तोड़ रहा है। क्षेत्र की लड़कियां विश्वविद्यालय पहुंचकर शिक्षा में गोल्ड मेडल प्राप्त कर रही हैं। सीसीएसयू में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में इस्लामाबाद की गुलिस्ता ने उर्दू विभाग से पीएचडी करके इस क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। गुलिस्ता की छोटी बहन भी उर्दू विभाग से पीएचडी कर रही है।
गुरुवार को चौधरी चरण सिंह विवि में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में इस्लामाबाद की गुलिस्ता को भी मेडल मिला। गुलिस्ता ने उर्दू विभाग से पीएचडी की है। गुलिस्ता ने बताया, पाक शायर फैज अहमद फैज की शायरी और नज्मों पर उन्होंने शोध किया है। गुलों में रंग भरे बाद.ए.नौ.बहार चले, चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले। फैज अहमद फैज का शेयर सुनाते गुलिस्ता ने बताया, यहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था। शादी के बाद पढ़ाई को जारी और भी मुश्किल था, लेकिन शौहर का साथ मिला और अपना शोध पूरा किया। बताया, वे परिवार की पहली लड़की है, जिसने शोध किया है। उनकी छोटी बहन भी उर्दू विभाग से पीएचडी कर रही है। गुलिस्ता ने बताया, और भी लड़कियां है जो पर्दे में रहकर तालिम याफ्ता हो रही है।
दर्जनभर मुस्लिम लड़कियों को मिले मेडल
दीक्षांत समारोह में दर्जनभर मुस्लिम लड़कियों को मेडल मिले हैं। आधा दर्जन ऐसी लड़कियां मेडल लेने पहुंची जो हिजाब में थी। राज्यपाल के हाथों मेडल पाकर इन लड़कियों की खुशी का ठिकाना नहीं था।
अब उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं मुस्लिम लड़कियां
मुजफ्फरनगर निवासी अरशी खान ने एमए उर्दू में मेडल पाया है। अजमत डिग्री कॉलेज मुजफ्फरनगर की छात्रा अरशी ने बताया, अब परंपराए टूट रही हैं और मुस्लिम लड़कियां पर्दे से बाहर निकलकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है।


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