जिले की चिकित्सा इकाइयों पर मनाया गया निक्षय दिवस
ओपीडी में 2022 मरीजों की हुई जांच, 44 संभावित मरीजों के सैंपल जांच के लिये भेजे गयेमेरठ, 15 दिसम्बर 2022। देश से 2025 तक टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में गुरुवार को जिले में सभी चिकित्सा इकाइयों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर प्रथम निक्षय दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान ओपीडी में आये 2022 मरीजों की जांच की गयी, जिसमें 44 संभावित मरीजों के बलगम के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे गये। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. अखिलेश मोहन व जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. गुलशन राय ने ओपीडी का निरीक्षण कर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया।
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. गुलशन राय ने बताया प्रथम निक्षय दिवस के अवसर पर गुरुवार को विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्रों की ओपीडी में 2022 मरीजों की टीबी की जांच की गयी। जिसमें 144 संभावित मरीजों बलगम के सैंपल जांच के लिये भेजे गये। उन्होंने बताया इस दौरान 176सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) व 392 आशा कार्यकर्ताओं को लगाया गया। उन्होंने कहा गुरुवार को ओपीडी में काफी मरीज आये थे, और लोगों ने जांच में रुचि दिखायी। इससे लगा कि लोग टीबी के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
उन्होंने बताया निक्षय दिवस के आयोजन का उद्देश्य क्षय रोग के बारे में जन.जागरूकता और मॉनीटरिंग बढ़ाना है, ताकि क्षय रोगियों की पहचान और उपचार जल्दी हो सके। दरअसल पल्मोनरी टीबी एक संक्रामक रोग है और पहचान में देरी होने से उपचार शुरू होने तक रोगी अपने संपर्क में आने वाले कई लोगों को संक्रमण दे चुका होता है। टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए संक्रमण का चक्र तोड़ना होगा।
डा. गुलशन राय ने बताया- अब सीएचओ के प्रयास से जो क्षय रोगी खोजे जाएंगे, निक्षय पोर्टल पर उनका नोटिफिकेशन वह स्वयं अपनी आईडी से करेंगे। यह जानकारी निक्षय पोर्टल पर मौजूद रहेगी कि कौन- कौन सीएचओ क्षय रोगियों को खोजने में अच्छा काम कर रहे हैं।
निक्षय योजना के बारे में लोगों को किया गया जागरूक
डा. राय ने बताया निक्षय दिवस के अवसर पर ओपीडी में मरीजों की जांच करने के साथ -साथ सीएचओ, एएनएम व आशा कार्यकर्ताओ ने ओपीडी में आने वाले लोगों को निक्षय दिवस के बारे में विस्तृत रूप से जागरूक किया। उन्हें बताया गया - विभाग की ओर से क्षय रोग की जांच और उपचार का प्रावधान है। निक्षय योजना के तहत उपचार जारी रहने तक सरकार की ओर से हर रोगी के बैंक खाते में प्रतिमाह पांच सौ रुपए का भुगतान किया जाता है । भले ही क्षय रोगी का उपचार किसी निजी चिकित्सालय से चल रहा हो। यह राशि क्षय रोगी को बेहतर पोषण के लिए दी जाती है। इसके लिए नोटिफिकेशन जरूरी है।


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