लैंगिक समानता की प्राप्ति में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर सेमिनार

15 दिवसीय संवेदीकरण कार्यक्रम का हुआ समापन

मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति द्वारा महिलाओं के प्रति भेदभाव एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को मिटाना के विषय पर आयोजित 15 दिवसीय कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।

संवेदीकरण कार्यक्रम की रूपरेखा में विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत प्रकोष्ठ की अध्यक्षा डॉ रीना विश्नोई ने विभिन्न ऑनलाइन व ऑफलाइन संसाधनों के प्रयोग द्वारा महिलाओं के प्रति होने वाली विभिन्न प्रकार की हिंसा चाहे वह आर्थिक सामाजिक मानसिक अथवा शारीरिक कैसे भी हो के प्रति महिलाओं को समिति के द्वारा जागरूक प्रदान की।  
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष्य में श्लैंगिक समानता की प्राप्ति में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका विषय पर सेमिनार का भी आयोजन किया गया।

सेमिनार का शुभारम्भ कुलपति मेजर जनरल डॉ. जी.के. थपलियाल, प्रतिकुलपति डॉ अभय शंकरगौड़ाय, डॉ. मुख्य अतिथि उषा साहनी, लॉ कॉलेज की डीन प्रो.डा. वैभव गोयल भारती, इलाहाबाद उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश के पूर्व न्यायमूर्ति राजेश चंद्र, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. शल्या राज, डेन्टल कॉलेज की प्रो. डॉ. विनीता निखिल, आंतरिक शिकायत समिति की अध्यक्षा प्रो.डॉ. रीना बिश्नोई, आफरीन अल्मास एवं अंजुम जहां द्वारा संयुक्त रूप से दीपक प्रज्जवलित कर किया गया।
 
मुख्य अतिथि का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया। आफरीन अल्मास द्वारा मां शारदे की वंदना कर स्वागत भाषण से अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के अगले चरण में अंजुम जहां द्वारा मानवाधिकारों पर एक मर्मस्पर्शी छाया वीडियो प्रस्तुत कर उपस्थित समुदाय को जागरूक किया गया।

लॉ कॉलेज के डीन प्रो. डॉ. वैभव गोयल भारतीय द्वारा सेमिनार की विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि सदियों से दुनियाभर में पितृसत्तात्मक समाज ने पुरुषों को यह विश्वास दिलाया है कि वे विशेष है और इस लिंग आधारित असमानता को दूर करने के लिए समय-समय पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशंस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सन 1979 से कन्वेंशन ऑन दी एलिमिनेशन ऑफ ऑल फॉर्म्स ऑफ डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वूमेन को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था। इसके अतिरिक्त उन्होंने इंटरनेशनल सिविल एवं पॉलीटिकल राइट नामक कन्वेंशन के विषय में भी बताते हुए कहा कि यह कन्वेंशन भी महिलाओं के समान अधिकारों के विषय में बात करती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने मानव अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय उद्घोषणा के विषय में भी बताते हुए कहा कि यह सारे ही कन्वेंशन महिलाओं को समान अधिकार देने की पैरवी करते हैं।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डा. उषा साहनी द्वारा महिला सशक्तिकरण पर बात करते हुए कहा गया कि प्रत्येक व्यक्ति यदि महिलाओं को सशक्त करना चाहता है तो इसकी शुरुआत उन्हें सर्वप्रथम अपने घर से करनी होगी क्योंकि यदि महिला घर में सशक्त है तब ही एक स्वस्थ और जागरूक समाज का निर्माण कर सकती है। वही प्रोफेसर विनीता निखिल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज हम महिला समानता पर बात कर रहे हैं परंतु हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि महिलाओं को जो अधिकार प्राप्त हैं उनका वे दुरुपयोग ना करें।

कुलपति मेजर जनरल डॉ. जी.के. थपलियाल ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया कि वैदिक काल से महिलाएं सशक्त रही हैं परंतु आज हमें उस विषय पर संवेदीकरण कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को जागरूक करने की आवश्यकता पड़ रही है यह अपने आप में एक सोचनीय विषय है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. शल्या राज ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि हम महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने की बात करते हैं तो सर्वप्रथम महिलाओं को आत्मरक्षा में निपुण होना होगा। यदि महिलाएं आत्मरक्षा में निपुण होंगी तब ही वे अपने विरोध किसी भी प्रकार के हिंसक व्यवहार को रोक सकेंगे।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश  के पूर्व न्यायमूर्ति राजेश चंद्र जी ने अपने वक्तव्य की शुरुआत एक शेर से करते हुए कहा कि जलते घर को देखने वालों फूस का छप्पर आपका है। आपके पीछे तेज हवा है आगे मुकद्दर आपका है। उनका कहना था कि यदि आप किसी महिला को मुसीबत में देखते हैं तो उसकी मदद अवश्य करें और अपनी बात को उन्होंने एक शेर के साथ पूरा करते हुए कहा कि उसके कत्ल पर मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया। मेरे कत्ल पर तू भी चुप है अगला नंबर तेरा है।

आखिरी चरण में प्रो. डॉ. रीना बिश्नोई अध्यक्षा आंतरिक शिकायत समिति सुभारती विश्वविद्यालय द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव कर कार्यक्रम का समापन किया गया।
डॉ. प्रेम चन्द्रा, डॉ. राम नवल, एना सिसोदिया, अजय राज सिंह आदि शिक्षकों का इस कार्यक्रम में योगदान रहा।

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