भारत जोड़ो यात्रा


कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का आगाज़ हो चुका है। यात्रा 150 दिनों में 3570 किलोमीटर की दूरी तय कर 12 राज्यों से गुजरेगी। महंगाई, बेरोजग़ारी, लडख़ड़ाती अर्थव्यवस्था, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, नफरत और डर आदि मुद्दों पर फोकस रहेगा। कांग्रेस नेता ज़मीनी स्तर पर आम जनता से मिलेंगे और उनके साथ पार्टी के जुड़ाव का मकसद स्पष्ट करेंगे। लोगों की सुनेंगे और अपनी बात रखेंगे। कांग्रेस का जनाधार पुख्ता और विस्तृत करने का भी मानस है। कांग्रेस को यात्रा का कुछ न कुछ राजनीतिक फायदा मिलना चाहिए, यह हमारा शुरुआती आकलन है। यदि 150 दिनों तक राहुल गांधी और उनके साथ के 118 ‘भारत यात्री’ तपस्या की तरह पदयात्रा करते रहे, तो लोग गंभीरता से उनकी आवाज़ सुनेंगे। यात्रा के दौरान राहुल भी ट्रकों पर बनाए गए मेकशिफ्ट कक्ष में ही रहेंगे। किसी होटल या रिसॉर्ट में नहीं जाएंगे और किसी भी रेस्तरां का खाना नहीं खाएंगे। जो आम कार्यकर्ता खाना बनाएंगे, उसे राहुल भी खाएंगे, ऐसा पार्टी के मुख्य प्रवक्ता जयराम रमेश का दावा है। बहरहाल यात्रा से कांग्रेस की स्वीकार्यता कितनी बढ़ेगी अथवा काडर का कितना विस्तार होगा, इनका आकलन तो बाद में ही किया जा सकता है, लेकिन कुछ मुद्दे बुनियादी तौर पर गलत और भ्रामक हैं। कांग्रेस की तरफ से दलीलें दी जा रही हैं कि देश को बचाना है। देश को एकजुट, जोड़ कर रखना है, लिहाजा यह यात्रा निकाली जा रही है। कांग्रेस लोकतंत्र और संविधान को बचाने का शोर भी मचाती रही है। दरअसल सवाल यह है कि देश को क्या हुआ है? देश के अस्तित्व पर क्या संकट हैं? देश कहां से विभाजित और विपन्न है? राजनीति के इतिहास में इंदिरा गांधी, चंद्रशेखर, लालकृष्ण आडवाणी, एनटी रामाराव, राजीव गांधी, राजशेखर रेड्डी, चंद्रबाबू नायडू, जगनमोहन रेड्डी, दिग्विजय सिंह और ममता बनर्जी सरीखे नेताओं की पदयात्राएं देखी गई हैं। उनके अपने-अपने मकसद और अपनी कहानियां थीं। उनकी यात्राएं कमोबेश राजनीतिक रूप से कामयाब भी रहीं। बेहतर होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी 3-4 राज्यों को चुनें और वहां पार्टी के पुनरोत्थान के लिए रात-दिन एक करें। उससे देश भी मजबूत होगा और कांग्रेस भी आपस में जुड़ सकेगी। फिलहाल कांग्रेस की स्थिति क्या है, राहुल बखूबी जानते हैं। कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए राहुल गांधी को पार्टी को जनता से जोडऩा चाहिए।

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