नशा की गिरफ्त में फंसती युवा पीढ़ी

- सूर्यदीप कुशवाहा, वाराणसी।

देश के विकास में युवा पीढ़ी का सदा से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि युवा पीढ़ी ही नशे जैसी भयानक राह पर चली जाएं तो फिर देश की तरक्की कैसे होगी? नशे से भले ही उन्हें दो पल के लिए सुख और मजा आता हो लेकिन इससे पूरा जिंदगी दुख से भर जाता है। नशे को अपना लत बना चुका व्यक्ति जीवन के महत्व को ही भूल जाता है। वह अपने परिवार के साथ समय बिताने और जिंदगी को आनंद पूर्वक जीने के बजाय नशे की दलदल में धंसते चला जाता है।
नशे से मानसिक सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर बुरा असर पड़ता है। घर में यदि एक व्यक्ति नशा करता है तो उसका प्रभाव उसके बच्चों पर पड़ता है, जो आगे चलकर वह भी नशे को अपना सहारा बना लेते हैं। इतना ही नहीं जो व्यक्ति नशा करता है, शारीरिक रूप से उसे बहुत कष्ट सहने पड़ते हैं। कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। लेकिन दुख की बात है कि इतना कुछ जानने के बावजूद वह अपने आपको नशे से दूर नहीं करता।



आज की युवा पीढ़ी नशे को फैशन समझने लगी है। उन्हें लगता है कि नशे करने में बहुत शान की बात है। दूसरों की देखादेखी में भी नशा करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि जो नशा कर रहे हैं वे आधुनिक जीवन जी रहे हैं।
इस तरह अपने आप को आधुनिक बनाने के चक्कर में वे भी नशे के चंगुल में फंस जाते हैं। सोशल मीडिया पर नशे से जुड़ी वीडियोस को देखकर वे भी नशे की राह पर चलना शुरू कर देते हैं। इस तरह आज की युवा पीढ़ी का नशे की राह पर जाने में सोशल मीडिया भी जिम्मेदार है।
आज के युवा वर्ग की यही समस्या है कि उनकी सहनशक्ति बहुत कम हो चुकी है। वे बहुत जल्दी अपना हौसला खो देते हैं। किसी चीज मे सफलता नहीं मिलता तो, उन्हें लगता है कि अब उनकी जिंदगी खत्म हो चुकी है। इसका परिणाम यह होता है कि वह डिप्रेशन में चले जाते हैं और फिर नशे की गिरफ्त में फंस जाते हैं। इससे उन्हें केवल उनके माता-पिता ही बचा सकते हैं।
उनके माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चे को ऐसे हालात से लड़ना सिखाएं, उन्हें मजबूत बनाएं। उनके असफलता पर उन्हें डांटने के बजाय उन्हें दोबारा प्रयास करने के लिए हिम्मत बढ़ाएं। जिंदगी में बहुत सारी राह है। एक राह पर सफलता नहीं मिली तो शायद दूसरी राह पर सफलता मिल जाए लेकिन चलना बंद नहीं करना है।
ज्यादातर युवा पीढ़ी गलत संगत में रहने के कारण ही नसे के चंगुल में फंस जाते हैं। जो लोग पहले से नशे की लत में है, वह दूसरों को नशा ना करने की सलाह देने के बजाय उन्हें भी नशे के दलदल में खींचने की कोशिश करते हैं। इसमें युवा खुद अपने आप को गलत संगत में फसने से बचा सकते हैं।
यदि कोई भी परेशानी आएं तो पहले माता-पिता को बताएं क्योंकि इस जीवन में माता-पिता से बढ़कर और कोई भी अच्छा दोस्त नहीं है। वे जितने अच्छे से आपकी समस्या को समझेंगे कोई अन्य नहीं समझेगा।
बच्चों पर माता-पिता की परवरिश बहुत ज्यादा प्रभाव डालती हैं। कुछ अमीर मां-बाप के कारण उनके बच्चे नशे की राह पर चले जाते हैं। उनके माता-पिता भी इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उनका बच्चा क्या कर रहा है?
उन्हे लगता है पैसा है तो, बच्चा कुछ भी करें कोई समस्या नहीं। एक युवा पीढ़ी के नशे में जाने के कारण अन्य युवा भी उसके देखा देखी नशे को अपना लत बना लेता है।
आज पैसे के लालच में बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी नशीली पदार्थों का प्रचार प्रसार करते हैं। जिसे देख युवा पीढ़ी उनसे प्रभावित हो जाती हैं और वे नशा करना शुरू कर देते हैं। इस तरह कहीं ना कहीं आज के युवा को नशे के दलदल में धकेलने में टीवी ऐड और फिल्म भी जिम्मेदार है, जिसमें नशीली पदार्थों का प्रचार प्रसार किया जाता है।
युवा पीढ़ी को नशे से मुक्त करने के लिए उठाए गए कदम
नशा मनुष्य के जिंदगी को तबाह कर देता है। जिंदगी सिगरेट के धुए से नहीं चलती बल्कि सुविचार और सुशिक्षा से चलती है। देश की युवा पीढ़ी को नशे से मुक्त करने के लिए भारत सरकार के द्वारा कई नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की गई है, जो लोगों में नशे को बंद करने के लिए जागरूकता फैलाती है।
युवा पीढ़ी जो नशे को अपना लत बना चुकी हैं। उनके नशे को छुड़वाने में मदद करती हैं। इसके अतिरिक्त वे अवैध रूप से नशीली पदार्थों की तस्करी करने वाले लोगों को या नशीली पदार्थ बेचने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाती है। कई सारी काउंसलिंग सेंटर है, जो जिंदगी से हार कर नशे की लत में पड़े इंसानों को जिंदगी की खूबसूरती से अवगत कराती है।
इस तरह नशे से युवाओं को मुक्त करने के लिए कई सारी संस्थान कार्य कर रही हैं लेकिन केवल इन संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है। युवाओं के माता-पिता और खुद युवाओं को भी जिम्मेदार होने की जरूरत है।
नशा एक दीमक की तरह होता है जिस तरीके से दीमक लकड़ी को धीरे-धीरे खत्म कर देता है, वैसे ही नशा भी एक व्यक्ति को धीरे-धीरे खत्म कर देती है। इससे ना केवल एक व्यक्ति का अस्तित्व खत्म हो जाता है बल्कि इससे इसके परिवार के लोगों की भी जिंदगी नरक बन जाती है।
आज सरकार और कई संस्थाएं है, जो युवा पीढ़ियों को नशा मुक्त करवाने के लिए प्रयासरत हैं। लेकिन उनके साथ युवा पीढ़ी को भी समझने की जरूरत है कि वह पढ़े लिखे हैं, अच्छे बुरे की पहचान भली-भांति कर सकते हैं। इसीलिए नशीली पदार्थों को अपना लत ना बनाएं।

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