डीपीओ ने पोषणयुक्त आहार खिलाकर कराया बच्चों का अन्नप्राशन
छह माह के बाद बच्चों को मां के दूध के साथ ऊपरी आहार जरूरी
मुजफ्फरनगर, 27 सितंबर 2022। जिले में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत मंगलवार को समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने छह माह से ऊपर के बच्चों को स्तनपान के साथ-साथ ऊपरी अर्द्ध ठोस आहार देने की जानकारी माताओं को दी। बाल विकास परियोजना शहर के खालापार में सभासद के साथ जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश गौड़ ने बच्चों को अपने हाथों से अन्नप्राशन का कराया। इस दौरान ऊपरी आहार के आठ सूत्रों “ छह माह पर ऊपरी आहार, नरम मसला हुआ भोजन, दिन में कम से कम तीन बार, दो साल तक स्तनपान जारी रखें, उम्र के अनुसार मात्रा बढ़ना, साफ - सफाई, सक्रियता और जिम्मेदारी से खाना खिलाना, वृद्धि निगरानी” के विषय में बताया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश गौड़ ने बताया- जिले में संचालित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें छह माह से ऊपर के बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा पोषणयुक्त आहार खिलाकर अन्नप्राशन किया गया। साथ ही गर्भवती महिलाओं को पोषण संबंधी जानकारी प्रदान की गई। उन्हें बताया गया किस तरह अपना औऱ होने वाले बच्चे का खाने-पीने का ध्यान रखना होगा। एक गर्भवती को कैसे और कितने आहार की आवश्यकता होती है। समय-समय पर कौन-कौन से टीके महिलाओं और नवजात बच्चों लगवाये जाने हैं।
इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने धात्री माताओं को बताया- छह माह तक के बच्चों को स्तनपान करना क्यों आवश्यक है। उसके पश्चात छह माह से ऊपर हो जाने पर बच्चे को अर्द्ध ठोस आहार की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में कौन-कौन से आहार बच्चे को देने चाहिए। बच्चों के शारीरिक विकास को देखते हुए पोषक आहार देना बहुत आवश्यक है। समय पर पोषक आहार न देने से बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। उनका शारीरिक विकास रुक जाता है। कुपोषण से बच्चों को अनेक बीमारी होने का डर भी बना रहता है। इसलिए छह माह से ऊपर के बच्चे को मां के दूध के साथ ऊपरी आहार देना बहुत आवश्यक है।
बच्चे को भोजन खिलाने के सही तरीके
• अलग कटोरी चम्मच का उपयोग करें ताकि आप जान सकें कि बच्चा कितना खा रहा है।
• बच्चे को उसकी आयु के अनुसार खाना दें । खाना खिलाने में जबरदस्ती न करें।
• भोजन में तेल/घी डाल कर उसका घनत्व बढ़ाएं ।
• एक बार में एक ही तरह का भोजन दें। भोजन का प्रकार व मात्रा धीरे-धीरे बढ़ायें
• बच्चें के भूख के संकेतों को समझें- बार बार हाथों को मुह में डालना, साड़ी का पल्लू खीचना, खाने की तरफ लपकना, रोना आदि।


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