तीन साल में 30 प्रतिशत घट गया मेरठ का निर्यात कारोबार

 व्यापार को लगा बड़ा झटका 

मेरठ। पिछले तीन साल में मेरठ में निर्यात मामले में काफी कमी आई है। 2019 के बाद से मेरठ व्यापार का निर्यात तेजी से घटा है। यह हम नहीं विदेश व्यापार महानिदेशालय के आंकड़े कह रहे हैं। मेरठ का निर्यात बीते तीन वर्ष में औसतन 30 प्रतिशत तक घट गया है। वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जहां 980.65 करोड़ रुपये के उत्पादन निर्यात हुए, वहीं यह आंकड़ा वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में 682.24 करोड़ रुपये ही रह गया। विशेषज्ञों का दावा है कि कोरोना के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक मंदी, कच्चे माल की कीमतों के साथ माल भाड़े में इजाफा और सरकार की नीतियां निर्यात को प्रभावित कर रही हैं।

चैंबर फॉर डेवलपमेंट एंड प्रमोशन ऑफ एमएसएमई के सचिव आशुतोष अग्रवाल ने बताया कि निर्यात के लिए जारी की गई सूची में मेरठ के स्वर्ण आभूषण नहीं हैं। यहां खंदक में बन रहे सूती चादर और खादी के कपड़े भी सुविधाओं के अभाव में निर्यात नहीं हो पाते हैं। आईआईए मेरठ रीजन प्रथम के डिविजनल चेयरमैन अनुराग अग्रवाल ने बताया कि हमारा उत्पाद चीन के मुकाबले बहुत महंगा है। इससे भी वैश्विक बाजार में यहां बने उत्पादों की मांग पर असर पड़ा है। सरकार की तरफ से भी कोई सब्सिडी नहीं दी जाती है। आईआईए के चेयरमैन सुमनेश अग्रवाल ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। इसका भी असर निर्यात पर पड़ता है।   

मेरठ के इन उत्पादों का होता है निर्यात

क्रिकेट बैट, टेबल टेनिस की टेबल, कैरम बोर्ड, टेनिस बॉल, प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, जिमनास्टिक उपकरण, मीट, चीनी, रेडियल टायर, क्राफ्ट पेपर, पेपर बोर्ड, कारपेट आदि। 

पहली तिमाही में निर्यात का आंकड़ा 

2019-20 - 980.65 करोड़

2020-21 - 583.75 करोड़ (कोरोना काल)

2021-22 - 682.24 करोड़

मेटको स्पोर्ट्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड आयुष महाजन ने बताया कि निर्यात के प्रभावित होने का सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार है। छोटी-छोटी चीजों के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सरकार की तरफ से सब्सिडी भी नहीं दी जाती है। 

माल भाड़े में पांच गुना इजाफा

वेस्टर्न यूपी चेंबर ऑफ कॉमर्स के वाइस प्रेसीडेंट शशांक जैन ने बताया कि निर्यातक के उत्पाद की कीमत बाजार तय करता है। कोविड के बाद माल भाड़े में पांच गुना इजाफा हुआ है। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा वाले देश सस्ते दाम में वस्तु उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में ऑर्डर नहीं मिलते।

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