प्रेम विवाह के बाद जन्मी बच्ची का हित सर्वोपरि

पिता को हाईकोर्ट ने दी बेल, महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की
मेरठ/लखनऊ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रेम विवाह से जन्मी एक बच्ची के हितों को देखते हुए उसके पिता को जमानत दे दी। पिता पर आरोप था कि वह अपने गांव और समुदाय की ही एक युवती को भगा ले गया था जो नाबालिग थी। कोर्ट ने माना कि ऐसे मामलों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए जिससे बच्ची के हित संरक्षित रहें। समाज की रूढ़ियों का दंश एक अबोध बच्ची क्यों सहे। कोर्ट ने पिता को निर्देश दिया है कि वह बच्ची के नाम दो लाख रुपये फिक्सड डिपाजिट कराए और पत्नी व बच्ची की देखभाल करे।
यह आदेश जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने याची राम शंकर की जमानत अर्जी को मंजूर करते हुए पारित किया। वह इस केस में ढाई साल से जेल में था। कोर्ट ने कहा कि याची और पीड़िता एक ही गांव के हैं और एक ही समुदाय के हैं। हो सकता है कि उनका विवाह कानूनसम्मत न हो, किंतु, उस बच्ची का क्या जो इन सब कानूनी पेचीदगियों से अनजान इस दुनिया में आई है।
कोर्ट ने कहा कि विवाह से जन्मे नवजात शिशु का जीवन दांव पर है, उसके लिए इस कोर्ट को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। याची और पीड़िता के परिवारों को भी व्यावहारिक सोच रखनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस रूढ़िवादी समाज में एक ही गांव के लोगों के बीच विवाह संबध स्वीकार नहीं किए जाते हालांकि ये गैरकानूनी नहीं कहे जा सकते हैं।
याची राम शंकर के खिलाफ लखीमपुर के मितौली थाने पर मई 2018 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि उसने गांव की ही एक लड़की को भगा लिया। लड़की के पिता ने कहा था कि उनकी बेटी नाबालिग है। बाद में पुलिस ने लड़की की बरामदगी दिखाई और दुराचार और पाक्सो अधिनियम की धाराओं में गिरफ्तार कर याची को एक अक्टूबर 2019 को जेल में डाल दिया था।
याची की ओर से दाखिल जमानत अर्जी में कहा गया था कि याची ने पीड़िता से मंदिर में विवाह किया है तथा उनकी शादी से उन्हें 12 दिसंबर, 2018 को एक बच्ची भी हुई है। वह अपनी पत्नी और नवजात बच्ची की जिम्मेदारी उठाना चाहता है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts