सरधना से साजिद कुरैशी की रिपोर्ट
सरधना (मेरठ) । रामभवन में चल रही रामकथा के दूसरे दिन कथाव्यास विख्यात सन्त विजय कौशल महाराज ने कहा कि
रामराज चर्चा और भाषणों से नहीं आता। रामराज्य आचरण, समक्ष त्याग और बलिदान, प्रेम, स्नेह की नींव पर खड़ा होता है। भगवान राम ने अपने राज्य में इन सारे गुणों को विकसित किया, और इनका जीवन भर पालन किया।
   विधायक संगीत सोम के सौजन्य से आयोजित रामकथा के धार्मिक आयोजन में प्रवचन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि जिस दिन से राम विवाहित होकर घर आए, अयोध्या में सम्पत्ति की बाढ़ आ गई। सभी लोग सुखी रहने लगे आपस में प्रेम और प्रगाढ़ हो गया।



  उन्होंने महाराज दशरथ का दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि दशरथ जी राजा होने के कारण आत्मावलोकन समय-समय पर करते रहते थे। इसलिए नेता, राजनेता, जनप्रतिनिधियों को आत्मनिरीक्षण करते रहना चाहिए।  महाराज श्री ने कहा किसी भी शुभ कार्य को कल पर नहीं टालना चाहिए। अगर टालना है तो अशुभ को टाल देना चाहिए।
 उन्होंने मंथरा के माध्यम से बताते हुए कहा कि कुसंग रूपी मंथरा को अपने आसपास भी नहीं रखना चाहिए। नहीं तो विनाश निश्चित है। संदेश दिया कि प्रत्येक मनुष्य को तिलक अवश्य लगाना चाहिए। क्योंकि तिलक लगाने से व्यक्ति अनेक प्रकार की सामाजिक बुराइयों से बच जाता है।
 कथा में मुख्य रूप से विधायक संगीत सोम उनकी पत्नी सिमरन ठाकुर, सुशील कुमार, वीरेन्द्र चौधरी, राजीव जैन, विनोद जैन, सचिन चौधरी, मुदित माहेश्वरी, नगेन्द्र राठी, वैभव बंसल, कमलेश पालीवाल, संजीव पवार, हिमांशु गोयल, नीरज गुप्ता, प्रदीप बुद्धिराजा, मदन लाल बंसल, गीतिका, वर्षा, इन्द्रा मानव, विपिन त्यागी, राहुल जैन, राजीव जैन, दीपक अरोरा, शौर्य गर्ग, सचिन खटीक, आदि उपस्थित रहे। प्रसाद का वितरण बालाजी गैस सर्विस के निदेशक सुधांशु गोयल परिवार की ओर से किया गया।

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