मां मुझे मत मार कोख में, धरती पर आना चाहूं मां। तुम ही हो जन्मदात्री मेरी, तुमसे ही जीवन मांगू मां।। मैं अधखिली कली हूँ किन्तु, तुमसे ही पूर्णता चाहूं माँ। तुम ही तो हो रक्षक मेरी, मैं तुम्हारी शरण चाहूं माँ।। तुम ही तो हो पालक मेरी, मैं तुमसे ही पोषण चाहूं माँ। बड़ी होकर बोझ न बनूंगी, तुम्हरा उपकार मानूँगी माँ।।
भाई की कलाई सजा दूंगी, बदले में कुछ न मांगूंगी माँ। पापा का मान बढ़ा दूंगी, पढ़ाई में अव्वल आउंगी माँ, माँ मुझे मत मार कोख में, धरती पर आना चाहूं माँ।। ------------- - मंजु कट्टा 'सजल' मेड़ता सिटी-नागौर (राजस्थान)
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