फिर हुईं अनसुनी, कैदियों की खामोश चीखें....: अतुल मलिकराम, राजनीतिक विश्लेषक
By News Prahari -
Meerut -गृह मंत्रालय द्वारा 2018 में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में हिरासत में 1,845 कैदी मौत के घाट उतर गए, जो पिछले 20 वर्षों में भारतीय जेलों में हुई सबसे अधिक मौतें हैं, जबकि जेलों की औसत ऑक्यूपेंसी 117.6% थी। निस्संदेह, भारत में जेलों की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में भीड़भाड़, कर्मचारियों की अनुपलब्धता और धन के अभाव के कारण काफी दयनीय हो चुकी है। इन बाधाओं ने कैदियों की संदिग्ध मौतों की बड़ी संख्या, कैदियों के बीच या कई बार कर्मचारियों के साथ हिंसक झड़पों, अस्वच्छता और अमानवीय जीवन को जन्म दिया है।
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