डीएम ने की निलंबित करने की सिफारिश


उन्नाव
। पंचायतीराज विभाग में वैसे गोलमाल है। अब एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है जिसमें 16.67 करोड़ रुपये का घालमेल होने की आशंका है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव को निलंबित करने की सिफारिश की है। उधर जांच टीम एक दो दिन में सम्बंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा सकती  है।
प्रदेश सरकार पंचायतीराज विभाग को स्वच्छता की जागरुकता के लिए आइईसी सूचना शिक्षा संचार मद से धनराशि देती है। इसके जरिए दीवार पेंटिंग, बैनर, पोस्टर आदि से स्वच्छता को लेकर प्रचार, प्रसार किया जाता है। पूर्व डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव ने स्वच्छ भारत मिशन एसबीएम के तहत वर्ष 2019.20 की सीए द्वारा तैयार की आडिट रिपोर्ट व उपयोगिता प्रमाणपत्र डीएम के सामने प्रस्तुत किया था। डीएम को यह मामला पहले से ही संदिग्ध लग रहा था। इसलिए इस पर खास नजऱ रख रहे थे। इस पर आइईसी मद में किस कार्य पर कब, कब व्यय हुआ इसका विवरण मांगा था।
आरोप है कि डीपीआरओ ने इस सबंध में कोई विवरण प्रस्तुत नहीं किया। वहीं मात्र पंचायत सचिव के हस्ताक्षर वाले उपभोग प्रमाणपत्र तैयार कराए। यही नहीं डीपीआरओ ने प्रधान तक के हस्ताक्षर नहीं कराए। डीएम ने इसे वित्तीय अनियमितता माना। अपर मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में डीएम ने बताया कि एसबीएम में सभी प्रकार की वित्तीय स्वीकृतियां जिलाधिकारी द्वारा दी जाती हैं। इसलिए उपयोगिता प्रमाणपत्र उनके स्तर से निदेशक को भिजवाया जाना चाहिए था लेकिन डीपीआरओ ने ऐसा नहीं किया। यही नहीं डीपीआरओ ने 2019.20 की वार्षिक बैलेंसशीट भी उनके हस्ताक्षर के बिना ही निदेशक को भेज दी। इन्हीं बिंदुओं पर रिपोर्ट भेजकर डीएम रवींद्र कुमार ने अपर मुख्य सचिव से डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव के निलंबन की संस्तुति की है।
वहीं सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने बताया कि आइईसीए प्रशासनिक व शौचालय व्यय में 16ण्67 करोड़ खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। परियोजना निदेशक डीआरडीए से पूरे मामले की जांच कराई गई। डीपीआरओ ने उन्हें और डीएम को जानकारी दिए बिना ही उपभोग प्रमाणपत्र सीधे निदेशक को भेज दिया। डीएम द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के अनुसार जानकारी नहीं दी। बताया कि मामले की वित्तीय जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जा रही है। टीम में परियोजना निदेशक के साथ जिला पंचायत के वित्तीय परामर्शदाता को रखा गया है। समिति वित्तीय अनिमितता की जांच करके रिपोर्ट देगी। उसी रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।

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