कोविड टीकाकरण के प्रभावी विस्तारीकरण पर वेबिनार का आयोजन
- जन्तु विज्ञान विभाग व एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज ने किया आयोजन
मेरठ, 26 जून 2021। डबल मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग आज भी कोविड संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। हर व्यक्ति कोविड से बचाव के लिए टीका अवश्य लगवाए। यह बात किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ में पल्मोनरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डा. सूर्यकांत त्रिपाठी ने कही। डा. सूर्यकांत शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की पहल पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कोविड टीकाकरण के प्रभावी विस्तारीकरण पर जंतु विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। शंका समाधान कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कोविड और टीकाकरण से जुड़े तमाम सवालों के जवाब भी दिये।
 उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा में लोगों का विश्वास बढ़ा है। जिस तरह से भारत सरकार कोविड के टीकाकरण को एक कुशल तरीके से संभाल रही है, वह सराहनीय है। भारत में मृत्यु दर दुनिया में सबसे कम है, साथ ही हम इतनी घनी आबादी वाले देश में इसे नियंत्रित करने में सक्षम हैं। यूपी में लॉकडाउन के उचित कार्यान्वयन और समानांतर टीकाकरण के बाद मामलों में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि लोगों ने डबल मास्क पहनकर सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व भी समझा और साबित किया कि यह भी कोविड-19 के प्रसार को रोकने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने बताया कि कैसे जागरूकता की कमी लोगों में वैक्सीन की झिझक का कारण है, तो यह शिक्षित लोगों का कर्तव्य है कि वह उन लोगों को वर्तमान परिदृश्य में टीकाकरण की जैवीय शक्ति के बारे में बताएं। प्रति कुलपति प्रो वाई. विमला ने कहा कि हमें यह जिम्मेदारी समझकर लोगों को बताना चाहिए कि कैसे टीकाकरण कोई खतरा नहीं है, बल्कि यह अभी खुद को कोविड -19 के प्रकोप से बचाने का तरीका है, यह सिर्फ हमें बचाने के लिए ही नहीं बल्कि अपने प्रियजनों को बचाने का भी तरीका है। इसके बाद एडिनबर्ग, ब्रिटेन में ड्रग डिजाइन और बायोमेडिकल साइंसेज की अनुसंधानकर्ता डा. नेहा निकिता नथानिएल ने कोविशील्ड और अन्य टीकाकरण के बारे में बताया, उन्होंने कोविशील्ड के दो टीकों के बीच की अवधि के महत्व के बारे में भी बताया। अनेक छात्रों व शिक्षकों व श्रोताओं ने 50 से अधिक प्रश्न पूछे। डा. सूर्यकांत जो कि उत्तर प्रदेश सरकार के ब्रांड अंबेसडर भी हैं, ने टीकों के संबंध में छात्रों की सभी गलतफहमी और भ्रम दूर किये। उन्होंने समझाया कि भारतीय टीके कोविशील्ड और कोवैक्सिन दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपको कौन सा मिलता है, महत्वपूर्ण यह है कि आप जल्द से जल्द टीकाकरण करवाएं। उन्होंने 18 वर्ष से कम उम्र के छात्रों,  गंभीर रूप से पीड़ित लोगों से कहा कि अभी उन्हें टीका नहीं लगवाना चाहिए, इन समूहों को छोड़कर सभी को टीका लगवाना चाहिए। जिन लोगों को कोविड हो चुका है और वह पहले ही ठीक हो चुके हैं, उन्हें टीकाकरण के लिए तीन महीने तक इंतजार करना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन सीसीएसयू विश्वविद्यालय में जूलॉजी की विभागाध्यक्ष प्रो नीलू जैन गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। 

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