स्वास्थ्य व प्रशासन की जांच पडताल में हुआ खुलासा
अस्पतालों में बाहरी मरीज भर्ती मिले, जिनको आक्सीजन की जरूरत नहीं थी वह भी लेटे मिले
मेरठ। अस्पतालों में कोरोना मरीजों को मिल रहे नो बेड के जवाब की सच्चाई जानने के लिए प्रशासन व स्वास्थ्य अफसरों ने पांच हॉस्पिटलों की जांच की। इन हॉस्पिटलों में करीब 80 मरीज बाहरी जिलों के भर्ती पाए गए। ज्यादातर इंश्योरेंस धारक थे। कइयों को ऑक्सीजन की जरूरत भी नहीं थी। डीएम को रिपोर्ट दे दी गई है।
एसीएम सुनीता सिंह व डिविजनल सर्विलांस अधिकारी सबसे पहले गढ़ रोड स्थित निजी अस्पताल में पहुंचे। इस हॉस्पिटल में 175 बेड में से कोविड के 174 मरीज भर्ती मिले। इनमें 71 मरीज दूसरे जिलों के थे। हॉस्पिटल प्रबंधन ने 140 मरीजों को ऑक्सीजन लगी होना बताया। रेंडम आधार पर अफसरों ने छह मरीजों से बात की। चार मरीजों ने बताया कि पिछले 10 दिन से उन्हें कोई ऑक्सीजन नहीं लगी। इसलिए यह बात गलत पाई कि 140 मरीज ऑक्सीजन पर थे। इस हॉस्पिटल में कुल भर्ती में से 83 मरीज इंश्योरेंस क्लेम वाले थे।
23 भर्ती बताए 16 मरीज मौजूद मिले
गढ़ रोड पर एक दूसरे निजी हॉस्पिटल को कोविड के 30 बेड आरक्षित थे। हॉस्पिटल प्रबंधन ने 23 मरीज भर्ती होना बताया। वास्तविकता में सिर्फ 16 मरीज भर्ती मिले। इनमें 5 गैर जनपद के मरीज थे। आईसीयू के 7 बेड खाली पाए गए।
188 मरीज भर्ती दर्शाए, दिखाया कोई नहीं
बागपत रोड पर एक प्रमुख हॉस्पिटल में 250 कोविड बेड की क्षमता है। हॉस्पिटल प्रबंधन ने 188 कोविड पॉजिटिव मरीज भर्ती होना बताया। जांच टीम ने जब मरीजों को दिखाने के लिए कहा तो हॉस्पिटल न तो मरीजों को दिखा पाया और न ही उनकी सूची उपलब्ध करा पाया। इससे हॉस्पिटल के 188 मरीजों के भर्ती होने के दावे पर प्रश्नचिन्ह लग गया।
यहां भी हुई जांच
एसीएमओ डॉ.एसके शर्मा और एसीएमओ चंद्रेश कुमार ने मोदीपुरम के दो हॉस्पिटल की जांच की। यहां भी कुल बेड के सापेक्ष भर्ती मरीजों का सत्यापन किया गया। एसीएम के अनुसार, जांच में भारी अनियमितता नहीं मिली।
यह हो सकता है खेल
. मरीजों को ज्यादा दिखाकर ऑक्सीजन सिलेंडर पाना
. इंश्योरेंस कार्ड पर भर्ती होकर उसका पूरा क्लेम पाना
. बाहरी मरीजों को भर्ती करके ज्यादा पैसा वसूलना
आज पांच अस्पतालों में जांच हुई। कुछ में अनियमितता मिली हैं। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है।
. डॉ. अशोक तालियान, डिविजनल सर्विलांस ऑफिसर
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