सरकार महिलाओं और बुजुर्गों को नोटिस भेजकर भयभीत कर रही 

नोटिस पर कोई किसान सरेंडर न करे, मोर्चा के अधिवक्ता करेंगे पैरवी

 


गाजियाबाद, 25 फरवरी। यूपी गेट (गाजीपुर बॉर्डर) पर संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में कहा गया कि दिल्ली पुलिस व केंद्र सरकार द्वारा तानाशाही रवैया अपनाते हुए वकीलों, मीडिया कर्मियों, बुजुर्गों, महिलाओं और विकलांगों आदि को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। यह सरकार की ओर से भय व डर पैदा करने की कोशिश है। संयुक्त किसान मोर्चा की गाजीपुर आंदोलन कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि मोर्चा मुकदमों व नोटिस के संबंध में दिल्ली पुलिस व केंद्र सरकार की निंदा करता है।
बाजवा ने बताया कि किसानों से कहा गया कि नोटिस मिलने पर कोई भी किसान सीधा पुलिस के सामने उपस्थित नहीं होगा। सभी नोटिस और मुकदमों का जवाब संयुक्त किसान मोर्चा के वकीलों द्वारा दिया जाएगा, साथ ही अगर दिल्ली पुलिस किसी भी किसान को गिरफ्तार करने गांव जाती है तो पुलिस कर्मियों का घेराव कर वहीं बैठाया जाएगा और स्थानीय शासन-प्रशासन के आने तक उन्हें नहीं जाने दिया जाएगा, साथ ही पुलिस के साथ कोई अभद्रता नहीं की जाएगी। 
किसान मोर्चा की ओर से कहा गया है कि किसान आंदोलन स्थल के आसपास की सड़कों वा रास्तों को बंद करने से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है, मोर्चा रास्ते खोलने की मांग करता है ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रेसवार्ता में किसान आंदोलन के संबंध में दिखाई जा रही झूठी खबरों की निंदा की गई और मीडिया से सही खबरें दिखाने का आग्रह किया गया। बाजवा ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 26 फरवरी को युवा किसान दिवस के रूप में मनाया जाएगा।  
27 फरवरी को रविदास जयंती व चंद्रशेखर आजाद के शहादत दिवस को आंदोलनकारी मजदूर- किसान एकता दिवस के रूप में मनाएंगे। इस दिन बहुत से मजदूर संगठन किसान आंदोलन को समर्थन देने आएंगे, साथ ही आंदोलन को हर गांव, हर घर तक पहुंचाने के लिए युवाओं को विशेषतौर पर गांव में लोगों से संपर्क करने की योजना बनाई गई है। साथ ही कहा गया कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होते और एमएसपी पर गारंटी का कानून नहीं बनता तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा। प्रेसवार्ता में जगतार सिंह बाजवा के अलावा डीपी सिंह, बलजिंदर मान और एडवोकेट वाशु कुकरेजा शामिल हुए।

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