बार्डर पर मंच के सामने बनकर तैयार हुआ टेंट
बृहस्पतिवार को मंच के सामने रही रौनक
गाजियाबाद, 24 फरवरी। किसान चुनौति का सामना करना जानता है। वह सर्दी की ठिठुरती रात में खेत में रहने का जुगाड़ कर लेता हैं और लू भरी दुपहरी भी उसे अपने खेत से अलग नहीं कर पाती। अब जब किसान के अस्तित्व को चुनौति मिलती दिख रही है तो वह तीन माह से अपने खेत छोड़कर दिल्ली की सरहदों पर जमा है, और तब तक जमा रहेगा जब तक सरकार नए कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती और एमएसपी के लिए कानून नहीं बना देती। दिल्ली की सरहदों पर भी किसान चुनौतियों का सामना बखूबी कर रहा है। सर्दी और बरसात में खुले आसमान के नीचे जमे रहने की चुनौति झेल चुका किसान अब गर्मी की चुनौति झेलने के लिए तत्पर है। धूप गर्म होने लगी तो किसानों ने अपने मंच के आगे छांव की व्यवस्था कर ली, लेकिन हार को स्वीकार नहीं किया, और न करेगा।
बृहस्पतिवार को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर संचालित संयुक्त किसान मोर्चा के मंच के आगे टेंट लगकर तैयार हो गया। टेंट तैयार होने के बाद मंच के सामने किसानों की बैठकी भी बढ गई। दरअसल किसान आंदोलन स्थल से कहीं चले नहीं गए थे। धूप तेज होने के कारण आंदोलनकारी छांव में चले जाते थे। जैसे ही मंच के सामने छांव की व्यवस्था हुई, फिर आंदोलनकारियों की संख्या मंच के सामने नजर आने लगी। किसान ने टेंट लगाकर धूप की चुनौति का सामना करने का जुगाड़ ठीक उसी तरह कर लिया जैसे वह अपने खेत में करता है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की ओर से आव्हान किया गया है कि किसान अपने खेत पर भी नजर रखें और आंदोलन पर भी। नंबर-बारी से आंदोलन स्थल पर आएं और उसी क्रम में अपने खेत का काम भी देखते रहे हैं। आंदोलन स्थल पर जब संख्या बढाने की जरूरत होगी, बता दिया जाएगा। यह भी किसान का चुनौति का सामना करने का मैनेजमेंट है।
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