डीएवी पब्लिक स्कूल में दशहरा महोत्सव की धूम, रामलीला और गरबा ने बांधा समां

रामलीला मंचन से जीवंत हुए श्रीराम के आदर्श, गरबा प्रतियोगिता में रिंकी शर्मा ने हासिल किया प्रथम स्थान

हापुड़, संवाददाता। डीएवी पब्लिक स्कूल, हापुड़ में दशहरा पर्व के उपलक्ष्य में भव्य सांस्कृतिक समारोह का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत भावपूर्ण रामलीला मंचन और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं, विद्यार्थियों की माताओं के लिए आयोजित गरबा प्रतियोगिता समारोह का विशेष आकर्षण रही। पूरे कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की मनमोहक छटा देखने को मिली।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री अनन्या त्यागी, श्रीमती अनीता राणा, श्री दीपक त्यागी और श्रीमती मंजूषा त्यागी उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने प्रभावशाली अभिनय, सजीव संवाद और भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र को मंच पर साकार किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में संगीत और नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत की झलक दिखाई दी। विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और अनुशासन ने सभी को प्रभावित किया।

गरबा प्रतियोगिता में माताओं ने बिखेरे रंग

कार्यक्रम में आयोजित गरबा प्रतियोगिता ने उत्सव का रंग और भी गहरा कर दिया। पारंपरिक परिधानों में सजी माताओं ने गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियों से वातावरण को उमंग और उल्लास से भर दिया। प्रतियोगिता में श्रीमती रिंकी शर्मा ने प्रथम, श्रीमती सीमा ने द्वितीय और रूपल त्यागी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, सोनी भारत और पूजा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतियोगिता ने विद्यालय और अभिभावकों के बीच आपसी सहयोग और आत्मीयता को भी बढ़ावा दिया।

सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक है दशहरा

विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. विनीत त्यागी ने अपने संबोधन में दशहरा पर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सत्य की असत्य पर, धर्म की अधर्म पर और सदाचार की दुराचार पर विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागकर आदर्श जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने, अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहने तथा प्रत्येक क्षेत्र में सत्य, अनुशासन और नैतिकता का पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनाओं, श्रेष्ठ संस्कारों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। समारोह ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक सहभागिता का संदेश दिया।

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