ई-वेस्ट का सही निस्तारण बचाएगा पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन: डॉ. मुकेश रुहेला
सुभारती विश्वविद्यालय में विशेषज्ञ व्याख्यान, विद्यार्थियों से जिम्मेदार उपभोग और ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण की अपील
मेरठ, वरिष्ठ संवाददाता। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में अंतरराष्ट्रीय ई-वेस्ट दिवस 2026 के अवसर पर “ई-वेस्ट प्रबंधन: एक सतत दृष्टिकोण” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय की पर्यावरण समिति एवं छात्र परिषद के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान, उसके सुरक्षित निस्तारण और संसाधनों के पुनर्चक्रण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश रुहेला ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ई-कचरे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अनुपयोगी होने के बाद यदि उनका गलत तरीके से निस्तारण किया जाता है, तो इससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए ई-कचरे को सामान्य कचरे की तरह फेंकने के बजाय उसका वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन करना आवश्यक है।
पुनर्चक्रण से बचेंगे प्राकृतिक संसाधन
डॉ. रुहेला ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कई मूल्यवान सामग्रियां होती हैं, जिन्हें पुनर्चक्रण के माध्यम से दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है। ई-कचरे का उचित प्रबंधन प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को कम करने, प्रदूषण पर नियंत्रण रखने और नए कच्चे माल की मांग घटाने में मददगार है। उन्होंने विद्यार्थियों को ई-कचरे के पर्यावरणीय प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए इसके सुरक्षित निस्तारण को प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि ई-कचरे को घरेलू या नगर निकाय के सामान्य कचरे में नहीं मिलाना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुले में जलाना, अनधिकृत तरीके से तोड़ना या असुरक्षित परिस्थितियों में उनके पुर्जे अलग करना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार एकत्र कर अधिकृत ई-वेस्ट संग्रहण एवं पुनर्चक्रण केंद्रों तक पहुंचाना चाहिए।
मरम्मत कर बढ़ाएं उपकरणों की उपयोग अवधि
मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों से इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदते समय अपनी वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल नई तकनीक या फैशन के कारण उपयोगी उपकरणों को बदलने से बचना चाहिए। उपकरणों की नियमित देखभाल और समय पर मरम्मत करके उनकी उपयोग अवधि बढ़ाई जा सकती है। जब कोई उपकरण पूरी तरह अनुपयोगी हो जाए, तो उसे सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय अधिकृत केंद्र के माध्यम से निस्तारित करना चाहिए।
डॉ. रुहेला ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। विद्यार्थी अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण, जिम्मेदार उपभोग और पुनर्चक्रण के प्रति जागरूक करके महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सहभागिता कर ई-वेस्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. श्वेता भारद्वाज ने किया। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और ई-कचरे के सुरक्षित प्रबंधन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।


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