महिलाओं में स्ट्रोक के लक्षणों को एंग्जायटी समझकर न करें नजरअंदाज
अचानक चक्कर, भ्रम और असामान्य थकान हो सकते हैं खतरे के संकेत, इलाज में देरी से बढ़ सकता है जोखिम
मेरठ। महिलाओं में ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को अक्सर तनाव, थकान, एंग्जायटी या पैनिक अटैक समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे समय पर इलाज मिलने में देरी हो सकती है। वर्ल्ड स्ट्रोक डे के अवसर पर विशेषज्ञों ने महिलाओं को शरीर में होने वाले अचानक और असामान्य बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। स्ट्रोक के मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और जल्द उपचार से गंभीर नुकसान का खतरा कम किया जा सकता है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. के.एम. हसन ने बताया कि न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में दो दशक से अधिक के अनुभव के दौरान उन्होंने देखा है कि महिलाओं में स्ट्रोक के लक्षण कई बार तनाव, थकान या पैनिक अटैक समझ लिए जाते हैं। अचानक चक्कर आना, जी मिचलाना, भ्रम की स्थिति बनना या असामान्य रूप से थकान महसूस होना जैसे बदलावों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
हार्मोनल बदलाव भी हो सकते हैं महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में स्ट्रोक के जोखिम को प्रभावित करने वाले कुछ विशेष कारण भी होते हैं। कुछ गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल, मेनोपॉज के दौरान हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं कुछ परिस्थितियों में खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ा सकती हैं। माइग्रेन की समस्या भी कुछ महिलाओं में स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी हो सकती है।
लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने या समझने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना अथवा नजर में अचानक बदलाव होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। चक्कर, भ्रम या जी मिचलाने जैसे असामान्य लक्षण भी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में खुद से बीमारी का अनुमान लगाकर आराम करने या लक्षणों के ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।


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