नवजात की सांस की नली की जटिल सर्जरी, न्यूटिमा के डॉक्टरों ने बचाई जान
ट्रेकियल स्टेनोसिस जैसी गंभीर बीमारी का किया उपचार, बाल रोग विशेषज्ञों और ईएनटी सर्जनों की टीम ने मिलकर संभाला मोर्चा
मेरठ । नवजात शिशुओं में सांस की नली का असामान्य रूप से संकरा होना गंभीर और जानलेवा स्थिति बन सकता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे ट्रेकियल स्टेनोसिस कहा जाता है। इस बीमारी में सांस लेने में अत्यधिक परेशानी होती है और गंभीर मामलों में बच्चे की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। ऐसे ही एक जटिल मामले में मेरठ स्थित न्यूटिमा अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जटिल शल्य चिकित्सा के माध्यम से नवजात की सांस लेने की समस्या का उपचार किया।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने किया उपचार
इस चुनौतीपूर्ण मामले में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित उपाध्याय और डॉ. प्रियंका गुप्ता के साथ ईएनटी सर्जन डॉ. सुमित उपाध्याय और डॉ. रेनू उपाध्याय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चिकित्सकों की टीम ने आपसी समन्वय के साथ बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उपचार की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान सांस लेने के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने की जटिल शल्य प्रक्रिया अपनाई गई।
नवजात की सर्जरी थी चुनौतीपूर्ण
ट्रेकियल स्टेनोसिस में सांस की नली संकरी होने के कारण हवा का आवागमन बाधित हो जाता है। बीमारी की गंभीरता और संकुचन की स्थिति के अनुसार विशेष शल्य चिकित्सा तकनीकों की मदद से श्वसन मार्ग को बहाल करने का प्रयास किया जाता है। नवजात शिशुओं में इस तरह की सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। इसमें बच्चे की नाजुक शारीरिक स्थिति, श्वसन मार्ग की संरचना, एनेस्थीसिया और ऑपरेशन के बाद गहन देखभाल का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
समन्वित उपचार से बढ़ती है जीवन बचने की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे जटिल मामलों में बाल रोग विशेषज्ञों और ईएनटी सर्जनों के बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण होता है। न्यूटिमा अस्पताल में किया गया यह उपचार गंभीर श्वसन समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के लिए उन्नत चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा सुविधाओं के महत्व को दर्शाता है।
चिकित्सकों का कहना है कि नवजात शिशुओं में सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श, उचित जांच और सही उपचार से गंभीर स्थितियों में बच्चे की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।


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