लोकों में लोक है कैशलोक
- ललिता जोशी
वैसे हम अक्सर तीन लोक और चौदह भुवन की बात करते हैं । हम में से अधिकांश लोग स्वर्गलोक जैसा घर चाहते हैं मृत्यु के उपरांत भी स्वर्ग चाहते हैं। यानि ज़िंदगी के साथ भी और ज़िंदगी के बाद भी। स्वर्ग तो एलआईसी की पॉलिसी की तरह ही है। भूलोक में तो आदिम जाति अपने कर्म करके अपने लिए धरती पर ही स्वर्ग बनाने का प्रयास करता है।
आजकल अपने देश में जहां देखो वहाँ से कैश ही कैश मिल रहा है। अपने देश में टैक्स की हेरा -फेरी या फिर किसी व्यापारी के फारेन एक्सचेंज में गड़बड़ियों का सुराग मिलते ही जांच एजेंसियाँ सक्रिय हो जाती हैं । फिर शुरू होता छापेमारी का कार्यक्रम और जहां कहीं भी ये एजेंसियां अपना काम करती हैं तो वहाँ-वहाँ पर नकद राशि के अंबार क्या पहाड़ के पहाड़ ही मिलते हैं। नेशनल चैनल पर जब ये खबर चलती है तो न्यूज़ एंकर बोलती है कि देखिये फिर से मिला एक और कैशलोक। भाई स्वर्गलोक, भूलोक और पाताललोक की चर्चे तो बचपन से सुनते आए हैं लेकिन अब उम्र के इस पड़ाव में कैशलोक चौथा लोक कैशलोक भी देख लिया ।
अब तो मृत्यु उपरांत हमारे लिए एक और लोक का विकल्प भी बढ़ गया हैं । इन तीन लोकों के आलवा एक लोक और तैयार हो चुका है । वैसे अपना देश अभी भी सोने की चिड़िया है जिसके पास कैश ही कैश और मूल्यवान धातुएं है । ये अलग बात है कि वो कुछ ही लोगों के पास संचित है । मगर भाई जब तक ज़िंदगी है। तब तक पैसा तो चाहिए ही । इसीलिए जब जैसा मौका लगे तब वैसा ही दबोच लो । किसी ने सही ही कहा है चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए । कोई कहता है माया महाठगनी लेकिन इस माया के चक्कर से कोई बच नहीं पाया है ।
अध्यात्म जगत से हों या राजनीति से हों या व्यापारी या फिर सर्विस क्लास,छात्र हो चाहे और कोई हो सभी को कैश की आवश्यकता तो रहती है । कैश से की जाने वाली ऐश के तो कहने ही क्या ? सरकार जितना मर्जी डिजिटल लेन -देन के लिए अभियान चलाये लेकिन कैश की चाहत पर कोई कैसे लगाम लगा सकता है । भई ये दिल का मामला है। दिल पर किसी का कोई ज़ोर नहीं चलता है । अपने देश में भ्रष्ट अधिकारियों ,दलालों , उद्योगपतियों के यहां जब -जब छापा पड़ा तो इतना कैश मिला कि उसकी गिनती के लिए मशीनें मंगवानी पड़ती हैं । ऐसे ही नेताओं के यहाँ से तो घर से लेकर खेत में कैश ही कैश था । कैश बेचारा बैंक के लॉकरों , रज़ाई ,गद्दे तकियों ,दीवारों ,पानी कि टंकियों और न जाने कैसी -कैसी जगह में कैद कर के रखा जाता है । कैश को तो बड़े -बड़े प्रभावशाली लोग अपने घर के नौकर-चाकरों के घर में भी रखवा देते हैं।
इन लोगों को पता है कि ये मातहत लोग अमानत में खयानत नहीं करेंगे । अगर कभी छापे में ये रकम पकड़ी भी गई तो पहले इन पर गाज गिरेगी । तब तक असली मालिकों को संभलने का मौका मिल ही जाता है । इनकी दो नंबर की कमाई इनके नौकरों के पास ऐसे सुरक्षित रहती है। जैसे की ईश्वर अपने भक्तों के भाव में रहते हैं ।भक्त को तो भगवान से कोई अलग नहीं कर सकता । फिर भी अगर कोई सरकारी एजेंसी इस भक्त के पीछे लग जाए तो कैश भगवान को कोई बचा ही नहीं सकता । वैसे भी आजकल तो कैश पर भगवान के अलावा सभी ऐश करते हैं । अभी हाल ही में मंदिरों में सेवादार ही भगवान को अर्पित रकम को चुरा रहे थे । इस पर कितना बवाल हुआ और मामला संसद तक पहुँच गया । संसद की कार्यवाही तक बाधित हुई इस कैशलोक के कारण । यहाँ तक की एक न्यायधीश के पास सुरक्षित कैश भी अग्निकांड के कारण बाहर निकल कर आ गया ।
भई कैशलोक में सभी वास करना चाहते हैं । कैशलोक में सभी रहना चाहते हैं । जीते -जीते जी कैश से क्या नहीं किया जा सकता है । वैसे सब कैश के लिए कहते हैं कि माया महाठगिनी लेकिन इस ठगिनी के मुरीद सभी हैं चाहे वो आम आदमी हो साधू-संत या फिर प्रभावशाली व्यक्ति हो । कैश को लक्ष्मी के नाम से भी संबोधित किया जाता है । सारा संसार लक्ष्मी की पूजा करता है ताकि उसका कैशलोक सदैव आबाद रहे। तभी तो बड़ी-बड़ी गाडियाँ, बंगले, महंगी घड़ियाँ, जेवर, कपड़े, महंगी शराब, पार्टियां सभी इसी कैश के कारण ही उपलब्ध हो पता है ।
स्वर्गलोक मृत्यु के उपरांत मिलता है पाताललोक में मनुष्य रह नहीं सकता और न ही वो वहाँ जा सकता है क्योंकि पाताल लोक के बाशिंदे दूसरे हैं । वैसे 21वीं सदी में कुछ भी असंभव नहीं है । भूलोक और कैशलोक में प्रगाढ़ संबंध है । भूलोक में रहते हुए ही सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ मनुष्य इस कैश से सारी सुविधाएं जुटा लेता है । ज़िंदगी के मजे लेता है ।इतना ही नहीं वो कैश द्वारा दान देकर अपने पाप भी पुण्य में परवर्तित करने का प्रयास करता है । वो पाप पुण्य में परिवर्तित हो या न हो वो तो बाद की बात है । सारा चक्कर कैश का है और उसके लोक का । वैसे दो वक़्त की रोटी की व्यवस्था हो ही जाती है लेकिन रोटी खाने की चाहत जब सोने और चाँदी की थाली में हो तो कैश की आवश्यकता तो होगी । सभी के पास तो पैसा कमाने का सीधा तरीका नहीं होता तो वो येन -केन प्रकारेण पैसा कमाने की होड़ में लग जाता है । पैसे की चकाचौंध में मनुष्य अपना विवेक खो बैठता है। नीतिशतक में भी कहा गया है कि :
यस्यास्ति वित्तम स: नर: कुलीन: ,स: कुलीन:, स: पंडित: स: श्रुतवान गुणज्ञ: ।
स: एव वक्ता स: च दर्शनीय:,सर्वे गुणा: कांचनम आश्रयन्ते ॥
यानि जिस व्यक्ति के पास धन है ,वह व्यक्ति उच्च कुल वाला है ,ज्ञानी है ,गुणवान है ,वक्ता है, केवल वही देखने योग्य है, क्योंकि सभी गुणों का आश्रय स्वर्ण (धन, कैश) में है अर्थात गुणों का निवास धन में है।
इसीलिए अधिकांश लोगों का ये मानना है कि पैसे यानि कैश से सब कुछ किया जा सकता है । हम अपने आस-पास ये सब देखते ही रहते हैं कि पैसे के बल पर बहुत कुछ किया जा सकता है और किया जाता है ।नाबालिग बच्चे अपराध करते हैं तो रसूख वाले अमीर मटा -पिताएक फिल्मी गीत याद आ रहा है।
ठन ठन की सुनो झंकार,
ये दुनिया है काला बाज़ार,
ये पैसा बोलता है,
पैसा बोलता है।
अभी हाल ही में नेपाल में जलप्रलय के कारण हुई तबाही के कारण काल के गाल में समाये मृत लोगों के शरीर से जेवर खींच -खींच कर उतार लिए गए । ये पैसे के पीछे पागलपन की झाँकी। इसीलिए तो कैशलोक की महिमा अपरम्पार है । जय हो कैश लोक की ।
(मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)






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