वर्ल्ड गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे मेरठ के आयुष सिरोही
तीन स्पीड स्पर्धाओं में उतरने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव, चयन ट्रायल में जीते एक स्वर्ण और दो रजत पदक
मेरठ। झिटकरी गांव के होनहार स्केटिंग खिलाड़ी आयुष सिरोही ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आयुष का चयन भारतीय स्केटिंग टीम में हुआ है। वह दो से 18 अक्टूबर तक दक्षिण अमेरिका में होने वाले वर्ल्ड गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। खास बात यह है कि आयुष वर्ल्ड गेम्स में तीन अलग-अलग स्पीड स्पर्धाओं में हिस्सा लेने वाले देश के पहले खिलाड़ी होंगे।
भारतीय टीम के चयन के लिए गौतमबुद्धनगर के सेक्टर-46 स्थित देवा सोम ट्रैक पर 29 अगस्त से दो सितंबर तक चयन ट्रायल आयोजित किए गए थे। आयुष ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते। इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका भारतीय टीम में चयन हुआ। फिलहाल वह मुख्य कोच देव कौशिक के निर्देशन में विशेष प्रशिक्षण शिविर में तैयारी कर रहे हैं।
तीन स्पर्धाओं में दिखाएंगे दम
आयुष के पिता रोहित सिरोही के अनुसार, उनका बेटा वर्ल्ड गेम्स में 200 मीटर ड्यूल टाइम ट्रायल, 100 मीटर रोड और रोड वन लैप स्पर्धा में हिस्सा लेगा। आयुष पिछले करीब सात वर्षों से नोएडा में स्केटिंग का अभ्यास कर रहे हैं। वह ग्रेटर नोएडा के ओमिक्रान-3 में रहते हैं और नोएडा सेक्टर-46 स्थित ट्रैक पर नियमित प्रशिक्षण लेते हैं।
सुबह चार बजे से शुरू होता है अभ्यास
आयुष की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत और अनुशासित दिनचर्या है। वह सुबह करीब तीन बजे उठते हैं और चार बजे ट्रैक पर पहुंचकर सुबह आठ बजे तक अभ्यास करते हैं। इसके बाद शाम छह बजे से रात दस बजे तक दोबारा प्रशिक्षण लेते हैं। कोच देव कौशिक के मार्गदर्शन में उनकी तैयारी लगातार जारी है।
परिवार के अनुसार, आयुष अब तक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में एक हजार से अधिक स्वर्ण और रजत पदक जीत चुके हैं। सीबीएसई की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। आगरा में आयोजित 21 किलोमीटर मैराथन में भी वह स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।
पिता का अधूरा सपना बेटा कर रहा पूरा
आयुष के पिता रोहित सिरोही किसान हैं और मां नीलम सिरोही गृहिणी हैं। रोहित का सपना खुद स्केटिंग खिलाड़ी बनने का था, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह इसे पूरा नहीं कर सके। उन्होंने बेटे को इस खेल में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आयुष ने अपनी मेहनत और लगन से पिता के इस सपने को नई उड़ान दी।
मां नीलम बेटे के खानपान और प्रशिक्षण का विशेष ध्यान रखती हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता को देखते हुए आयुष की डाइट में बादाम, अफगानी किशमिश, अंजीर, खुमानी, काला चना और मूंग की दाल जैसे पौष्टिक आहार शामिल किए गए हैं।
पढ़ाई के साथ खेल में भी आगे
आयुष खेल के साथ पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं। वह गलगोटिया विश्वविद्यालय में बीबीए द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। उनके प्रशिक्षण में मुख्य कोच देव कौशिक के अलावा मेरठ के सात अन्य कोच भी सहयोग कर रहे हैं। परिवार के अनुसार, आयुष की मेहनत और प्रतिभा को देखते हुए कोच देव कौशिक उनसे प्रशिक्षण की फीस नहीं लेते हैं।
सात साल पहले छोड़ा झिटकरी गांव
आयुष की प्रतिभा और स्केटिंग के प्रति लगन को देखते हुए परिवार ने करीब सात साल पहले झिटकरी गांव छोड़ दिया था। इसके बाद आयुष ने नोएडा में रहकर नियमित प्रशिक्षण शुरू किया। अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीतना उनका अगला लक्ष्य है।


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