पत्नी ने किडनी देकर पति को दिया नया जीवन, रोबोटिक ट्रांसप्लांट से मिली नई जिंदगी

मैक्स वैशाली में 54 वर्षीय मरीज का सफल एडवांस्ड ABO-कम्पैटिबल रोबोट-असिस्टेड किडनी ट्रांसप्लांट

मेरठ। पारिवारिक समर्पण और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक की मिसाल पेश करते हुए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डॉक्टरों ने 54 वर्षीय मरीज का सफल रोबोट-असिस्टेड रीनल ट्रांसप्लांटेशन (RAKT) किया। एंड-स्टेज रीनल डिजीज (ESRD) से पीड़ित मरीज करीब दो वर्षों से क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) स्टेज-5 से जूझ रहे थे और नियमित हीमोडायलिसिस पर निर्भर थे। उनकी 54 वर्षीय पत्नी श्रीमती उमेश देवी ने अपनी एक किडनी दान कर पति को नया जीवन दिया।

अहमदनगर, उत्तर प्रदेश निवासी श्री सरजीत सिंह की बीमारी धीरे-धीरे बढ़कर एंड-स्टेज रीनल डिजीज में बदल गई थी। इसके बाद उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मैक्स सेंटर फॉर ऑर्गन ट्रांसप्लांट, मैक्स हॉस्पिटल वैशाली में भर्ती कराया गया। विस्तृत चिकित्सकीय जांच में उनकी पत्नी ABO-कम्पैटिबल लिविंग डोनर पाई गईं। उन्होंने स्वेच्छा से पति को अपनी किडनी देने का फैसला किया।

रोबोटिक तकनीक से सर्जरी में बेहतर प्रिसीजन

मैक्स वैशाली के यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. उपवन चौहान ने बताया कि रोबोट-असिस्टेड रीनल ट्रांसप्लांटेशन से सर्जरी में अधिक प्रिसीजन और बेहतर सर्जिकल कंट्रोल मिलता है। खासतौर पर तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण ट्रांसप्लांट प्रक्रियाओं में इसका लाभ मिलता है। इस मामले में डोनर और रिसिपिएंट दोनों की सुरक्षा के साथ ट्रांसप्लांट की गई किडनी की बेहतर कार्यक्षमता सुनिश्चित करना प्राथमिकता रही।

नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रो. डॉ. विशाल सिंह ने कहा कि एंड-स्टेज रीनल डिजीज और डायलिसिस पर निर्भर मरीज के लिए सफल किडनी ट्रांसप्लांट जीवन की दिशा बदल सकता है। इस केस में पत्नी का पति के लिए डोनर बनने का निर्णय महत्वपूर्ण रहा। डोनर और रिसिपिएंट की विस्तृत जांच तथा ट्रांसप्लांट से पहले और बाद की मेडिकल मैनेजमेंट ने सुरक्षित परिणाम में अहम भूमिका निभाई।

विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिनव कत्याल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट में सर्जरी से पहले, सर्जरी के दौरान और बाद में लगातार निगरानी और समन्वित चिकित्सा प्रबंधन जरूरी होता है। इस मामले में ट्रांसप्लांट के बाद मरीज में तुरंत अच्छा यूरिन आउटपुट देखा गया और किडनी फंक्शन में तेजी से सुधार हुआ।

15 दिन में मरीज और छह दिन में डोनर को मिली छुट्टी

ट्रांसप्लांट के बाद नई किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया। मरीज की हालत में लगातार सुधार हुआ और उन्हें 15 दिनों के भीतर स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं, डोनर श्रीमती उमेश देवी की भी सर्जरी के बाद अच्छी रिकवरी हुई और उन्हें छह दिनों में डिस्चार्ज कर दिया गया।

सफल ट्रांसप्लांट के बाद सरजीत सिंह और उनके परिवार में नई उम्मीद जगी है। यह मामला अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम और परिवार के सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है। साथ ही, यह डायलिसिस पर निर्भर एंड-स्टेज रीनल डिजीज के मरीजों के लिए लिविंग ऑर्गन डोनेशन की अहमियत को भी सामने लाता है।

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