दूसरी चकबंदी के खिलाफ किसानों का मोर्चा, कमिश्नर को ज्ञापन
दबथुआ में प्रक्रिया निरस्त करने की मांग, बोले- मांग नहीं मानी तो करेंगे बड़ा आंदोलन
मेरठ। सरधना तहसील क्षेत्र के दबथुआ गांव में चल रही दूसरी चकबंदी प्रक्रिया के खिलाफ किसानों और ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों, कृषकों और ग्रामसभा सदस्यों ने मंडलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर चकबंदी प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम-1953 की धारा 6(1) के तहत अधिसूचना जारी कर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले भी चकबंदी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वर्ष 1983-84 में शुरू हुई प्रक्रिया करीब 25 साल तक लंबित रही। ग्रामीणों ने धरातलीय जटिलताओं, कथित अनियमितताओं और किसानों के विरोध का हवाला देते हुए बताया कि शासन स्तर पर कार्रवाई के बाद 31 मार्च 2010 को चकबंदी प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी।
किसानों के अनुसार चकबंदी निरस्त होने के बाद भू-अभिलेख और राजस्व रिकॉर्ड तहसील सरधना को वापस हस्तांतरित कर दिए गए थे। अब दोबारा चकबंदी शुरू होने से पुराने विवाद और समस्याएं फिर सामने आने की आशंका है। किसानों का कहना है कि इसका सीधा असर उनकी कृषि भूमि और वर्षों से चले आ रहे भूमि संबंधी अधिकारों पर पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने मंडलायुक्त से वर्ष 2010 में चकबंदी निरस्त किए जाने के आदेश और पुराने अभिलेखों की जांच कराने के साथ वर्तमान प्रक्रिया की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसानों की आपत्तियों और पूर्व के सरकारी आदेशों का समुचित परीक्षण किए बिना प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों ने कहा कि कृषि भूमि से जुड़े इस संवेदनशील मामले में प्रशासन किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए उचित निर्णय करे।

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