बाब अल-मंदेब के करीब मोचा पर हूती लड़ाकों का कब्जा, सऊदी अरब की बढ़ी चिंता

यमन सरकार को बड़ा झटका, सुरक्षाकर्मियों को खदेड़कर शहर पर नियंत्रण का दावा; रणनीतिक समुद्री मार्ग पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश

नई दिल्ली। यमन में जारी संघर्ष के बीच हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब समर्थित यमन सरकार को बड़ा झटका देते हुए लाल सागर के तट पर स्थित मोचा शहर पर कब्जा करने का दावा किया है। मोचा बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 50 मील दूर है। इस क्षेत्र पर हूतियों की बढ़ती पकड़ से लाल सागर के अहम समुद्री मार्ग और सऊदी अरब की तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सुरक्षाकर्मियों को खदेड़कर कब्जे का दावा

रॉयटर्स के अनुसार, यमन सरकार के तीन अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को हूती लड़ाकों और यमनी सुरक्षा बलों के बीच भीषण झड़प हुई। इसके बाद सरकारी सुरक्षाकर्मी इलाके से पीछे हट गए और हूती लड़ाकों ने मोचा पर नियंत्रण कर लिया। कब्जे के बाद हूती समर्थकों ने जश्न मनाया, जिसके वीडियो भी सामने आने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने यमन सरकार के रक्षा मंत्री को निशाना बनाने की भी कोशिश की, हालांकि वह हमले में बाल-बाल बच गए।

पेरम द्वीप पर भी नजर

बाब अल-मंदेब पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पेरम द्वीप को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मोचा के नजदीक स्थित इस द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने के लिए हूती लंबे समय से प्रयास करते रहे हैं। मोचा पर कब्जे के बाद अब उनकी नजर पेरम की ओर होने की बात कही जा रही है।

क्यों महत्वपूर्ण है बाब अल-मंदेब?

बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के बीच व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम भूमिका निभाता है। इसी वजह से इस क्षेत्र में किसी भी पक्ष का सैन्य नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर डाल सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के समुद्री रास्ते से गुजरने वाले तेल और एलएनजी का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा बाब अल-मंदेब मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में हूतियों की बढ़ती पकड़ से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

सऊदी अरब के लिए क्यों बढ़ी परेशानी?

मोचा पर हूती नियंत्रण को सऊदी अरब के लिए रणनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में हूतियों की स्थिति मजबूत होने से समुद्री रास्ते से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, मोचा पर कब्जे के बाद बाब अल-मंदेब पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित हो गया है, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। पेरम द्वीप और आसपास के समुद्री क्षेत्र का नियंत्रण भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

हूतियों ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब पाकिस्तान और तुर्की की ओर से उन्हें संघर्ष से पीछे हटने की अपील किए जाने की बात सामने आई है।

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