चंद्रशेखर आजाद को चुनौती देने की तैयारी में रोहिणी घावरी, राजनीति में उतरने का ऐलान

स्विट्जरलैंड से लौटकर वाल्मीकि समाज को संगठित करने में जुटीं रोहिणी, यूपी समेत चार राज्यों में सक्रियता बढ़ाने की तैयारी

मेरठ। स्विट्जरलैंड में पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं रोहिणी घावरी अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने की तैयारी में हैं। रोहिणी ने वाल्मीकि समाज को राजनीतिक रूप से संगठित करने और अगले पांच वर्षों में समाज के किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने का लक्ष्य रखा है। उनकी राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत उत्तर प्रदेश से होने की बात कही जा रही है। इस दौरान उनका फोकस उन विधानसभा क्षेत्रों पर रहेगा, जहां वाल्मीकि समाज की चुनावी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

रोहिणी 11 सितंबर को स्विट्जरलैंड से भारत लौटीं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित भगवान वाल्मीकि आश्रम पहुंचकर आशीर्वाद लिया। उनका कहना है कि वह देशभर में वाल्मीकि समाज को संगठित करने के लिए अभियान चलाएंगी। इसके तहत दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में समाज के लोगों के साथ संवाद की योजना बनाई गई है।

पांच साल में वाल्मीकि समाज के मुख्यमंत्री का लक्ष्य

रोहिणी के मुताबिक, देश में विभिन्न वर्गों के लोगों को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला है तो वाल्मीकि समाज को भी सत्ता के शीर्ष पद तक पहुंचने का अधिकार है। उनका कहना है कि लंबे समय से समाज को मुख्य रूप से सफाई कार्य से जोड़कर देखा गया है। अब जरूरत राजनीतिक नेतृत्व और आत्मविश्वास पैदा करने की है।

उन्होंने अगले पांच वर्षों में किसी एक राज्य में वाल्मीकि समाज के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने को अपना राजनीतिक लक्ष्य बताया है। वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, यह लक्ष्य हासिल हो या न हो, लेकिन इसके जरिए समाज के बीच राजनीतिक महत्वाकांक्षा और प्रतिनिधित्व की चर्चा को तेज किया जा सकता है।

मेरठ में भी समाज के लोगों से करेंगी संवाद

भारत लौटने के बाद रोहिणी ने दिल्ली में वाल्मीकि समाज के लोगों के साथ बैठक की। इसके बाद 12 सितंबर को उन्होंने हरियाणा के गुरुग्राम में समाज के लोगों से संवाद किया। 13 सितंबर को मेरठ पहुंचने का कार्यक्रम है। इसके बाद 14 और 15 सितंबर को लखनऊ में वाल्मीकि समाज के लोगों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। 16 सितंबर को वह इंदौर जाएंगी।

रोहिणी की इस सक्रियता को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी क्षेत्र में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की भी मजबूत राजनीतिक मौजूदगी है।

सामाजिक न्याय और राजनीतिक हिस्सेदारी पर फोकस

रोहिणी अपनी बैठकों में दलित समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और सामाजिक न्याय के मुद्दे उठाने की बात कह रही हैं। उनका विशेष फोकस वाल्मीकि समाज पर है। वह जाटव और वाल्मीकि समाज के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों को लेकर भी सवाल उठा रही हैं।

उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21 प्रतिशत है, जबकि वाल्मीकि समाज की आबादी लगभग 3.19 प्रतिशत है। इसके बावजूद सरकारी नौकरियों और राजनीति में समाज की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। रोहिणी का कहना है कि वाल्मीकि समाज को अपनी राजनीतिक ताकत पहचानने और नेतृत्व विकसित करने की जरूरत है।

प्रभाव वाली विधानसभा सीटों पर बढ़ाएंगी सक्रियता

रोहिणी ने उत्तर प्रदेश की करीब 21 विधानसभा सीटों को चिन्हित करने की बात कही है, जहां वाल्मीकि मतदाता चुनावी समीकरणों में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। इनमें आगरा कैंट, एत्मादपुर, जसराना, फिरोजाबाद, मेरठ कैंट, मेरठ शहर, गाजियाबाद, लोनी, लखनऊ मध्य, लखनऊ उत्तर, लखनऊ पश्चिम, सीसामऊ, आर्यनगर, किदवई नगर, अलीगढ़, कोल और खैर समेत अन्य सीटें शामिल बताई गई हैं।

रोहिणी इन क्षेत्रों में वाल्मीकि समाज के बीच संपर्क बढ़ाने और राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर उनका फोकस खास तौर पर चंद्रशेखर आजाद के प्रभाव वाले इलाकों में भी रहने की संभावना है। यहां वह अपने पुराने संबंधों और मतभेदों को लेकर भी लोगों के बीच अपनी बात रखने की तैयारी में हैं।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts