मेरठ बंद के बाद चंदे पर घमासान

 1.80 करोड़ रुपये जुटाने का आरोप, समिति बोली- पूरा हिसाब पारदर्शी

सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप तेज; डॉ. नगेंद्र ने अधिवक्ता की फीस के नाम पर चंदा

 जुटाने पर उठाए सवाल, समिति ने हिसाब देखने का दिया न्योता

मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के विरोध में हुए मेरठ बंद के बाद अब आंदोलन के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर व्यापारियों और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। डॉ. नगेंद्र ने आरोप लगाया है कि अधिवक्ता की फीस के नाम पर करीब 1.80 करोड़ रुपये चंदा जुटाया गया है और इसमें बंदरबांट की जा रही है। वहीं, संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति ने आरोपों को खारिज करते हुए चंदे की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया है।

मेरठ बंद के बाद उठा चंदे का मुद्दा

संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर के आह्वान पर बुधवार को शास्त्रीनगर, जागृति विहार, माधवपुरम समेत कई इलाकों में बाजार बंद रहे थे। बंद के अगले दिन चंदे के हिसाब को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे।

नीमा के पूर्व अध्यक्ष और सर्वोदय नर्सिंग होम के मालिक डॉ. नगेंद्र ने चंदे की रकम को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया कि अधिवक्ता की फीस के नाम पर अब तक करीब 1.80 करोड़ रुपये एकत्र किए जा चुके हैं।

डॉ. नगेंद्र ने आवास-विकास परिषद के अधीक्षण अभियंता राहुल यादव के निलंबन और आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग पर भी सवाल उठाए।

‘नर्सिंग होम एसोसिएशन ने दिए थे 10 लाख’

डॉ. नगेंद्र के मुताबिक, नर्सिंग होम एसोसिएशन की ओर से करीब 10 लाख रुपये एकत्र करके दिए गए थे। इसके बाद चंदे की रकम और उसके इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापारियों के बीच बहस तेज हो गई।

समिति बोली- प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी

चंदे को लेकर उठे सवालों पर संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि चंदा जुटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।

उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और पूरा हिसाब देखने की अपील की। समिति का कहना है कि चंदे से संबंधित सभी जानकारी देखने के लिए उपलब्ध है।

लोकेश खुराना ने वायरल वीडियो पर जताई चिंता

सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर बुधवार को गुरुद्वारा रोड पर हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान मंच से की गई कथित टिप्पणियों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने दावा किया कि वायरल वीडियो में उनके खिलाफ धमकी भरी टिप्पणी की गई है। उनका कहना है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में खुले मंच से इस तरह की टिप्पणी किया जाना गंभीर मामला है।

‘21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में उठाएंगे मामला’

लोकेश खुराना ने कहा कि वह धमकी से जुड़े मामले को अदालत के सामने रखेंगे। उनके मुताबिक, 21 सितंबर को सेंट्रल मार्केट प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा।

खुराना ने कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है। उन्होंने दावा किया कि यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए धमकी देने वाले लोग जिम्मेदार होंगे।

‘नगेंद्र ने चंदा नहीं दिया तो हिसाब मांगने का अधिकार नहीं’

नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अंबेश पंवार ने डॉ. नगेंद्र के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि डॉ. नगेंद्र ने कोई चंदा नहीं दिया है, इसलिए उन्हें हिसाब मांगने का अधिकार नहीं है।

डॉ. पंवार के अनुसार, अधिवक्ता की फीस अभी तक दी ही नहीं गई है और चंदे के रूप में जुटाई गई धनराशि एसोसिएशन के पास ही मौजूद है।

विवाद का केंद्र क्या है?

सेंट्रल मार्केट प्रकरण में ध्वस्तीकरण के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन अब चंदे की रकम, उसके इस्तेमाल और कथित धमकियों को लेकर नए विवाद में घिर गया है। फिलहाल 1.80 करोड़ रुपये जुटाए जाने का आरोप और उसके हिसाब को लेकर दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने हैं। समिति ने पारदर्शिता का दावा करते हुए पूरा हिसाब दिखाने की बात कही है।

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