154 दिन से धरने पर बैठी महिलाओं ने ठुकराई नई पुनर्वास नीति

बोलीं- सरकार हमें घरों से बेदखल करना चाहती है, किसी भी कीमत पर मकान नहीं छोड़ेंगे

आवास विकास परिषद ने प्रोजेक्टर के जरिए समझाई नीति, सेक्टर-2 के 1290 मकान चिन्हित

मेरठ। आवास विकास परिषद की कार्रवाई के विरोध में पिछले 154 दिनों से धरने पर बैठी महिलाओं ने प्रदेश सरकार की नई पुनर्वास नीति को मानने से साफ इनकार कर दिया है। महिलाओं का आरोप है कि सरकार नई नीति के बहाने उन्हें उनके घरों से बाहर करना चाहती है। उन्होंने दो टूक कहा कि वे किसी भी हालत में अपने मकान नहीं छोड़ेंगी, चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कदम क्यों न उठाना पड़े।

धरने पर बैठी महिलाओं के अनुसार, आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया था। वहां प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रदेश सरकार की नई पुनर्वास नीति के प्रावधानों को समझाया गया। अधिकारियों ने बताया कि सरकार इस नीति को लागू करने की तैयारी कर रही है।

महिलाओं के मुताबिक, आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता अभिषेक राज ने बताया कि सेक्टर-2 में 1290 मकानों को चिन्हित किया गया है। इनमें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मकान और ढाई मीटर तक के मकान शामिल हैं। इन मकानों को तोड़कर वहां करीब 20 मंजिल के टावर बनाए जाने की योजना है। अधिकारियों की ओर से इसे प्रभावित लोगों के हित में बताया गया।

हालांकि, महिलाओं ने परिषद के अधिकारियों के सामने नई पुनर्वास नीति को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें इस नीति पर भरोसा नहीं है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार की योजना से आम लोगों की बजाय बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

महिलाओं ने अधिकारियों से कहा कि वे वर्षों से अपने मकानों में रह रही हैं और किसी भी कीमत पर अपने आशियाने नहीं छोड़ेंगी। उनका कहना था कि सरकार को पहले प्रभावित परिवारों के हित और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

धरने पर बैठी महिलाओं ने साफ चेतावनी दी कि वे किसी भी हाल में अपने मकान खाली नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि अपने घरों और अधिकारों की रक्षा के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो इसे और व्यापक किया जाएगा।

154 दिनों से चल रहे धरने के बीच अब नई पुनर्वास नीति को लेकर आवास विकास परिषद और प्रभावित परिवारों के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। महिलाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों और आशंकाओं का समाधान नहीं होता, तब तक वे पीछे हटने वाली नहीं हैं।

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