नेपाल की बाढ़ का भारत पर असर, बिहार-यूपी और उत्तराखंड में हाई अलर्ट

गंडक बैराज के 36 गेट खोले गए, बिहार के 9 और यूपी के 7 जिलों में निगरानी बढ़ी; चंपावत में शारदा नदी के किनारे SDRF तैनात

पटना/लखनऊ/देहरादून। नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड का असर अब भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। नेपाल से आने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार के 9, उत्तर प्रदेश के 7 जिलों और उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी चंपारण में गंडक नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद प्रशासन ने गंडक बैराज के 36 गेट खोल दिए हैं।

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 163 से अधिक लोगों की मौत और 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की सूचना है। भारत में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

बिहार के 9 जिलों में हाई अलर्ट

नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका के चलते बिहार के नौ जिलों को संवेदनशील मानते हुए अलर्ट किया गया है। इनमें शामिल हैं—

  • पश्चिमी चंपारण
  • पूर्वी चंपारण
  • गोपालगंज
  • मुजफ्फरपुर
  • सिवान
  • सारण
  • शिवहर
  • सीतामढ़ी
  • वैशाली

पश्चिमी चंपारण में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने बैराज के 36 गेट खोल दिए हैं। नदी किनारे बसे इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति और राहत-बचाव की तैयारियों की समीक्षा की है।

यूपी के 7 जिलों में भी निगरानी

उत्तर प्रदेश में भी नेपाल से आने वाली नदियों के संभावित प्रभाव को देखते हुए सात जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इनमें महाराजगंज, कुशीनगर, पीलीभीत, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर शामिल हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक व नारायणी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अधिकारियों को तैनात कर स्थिति की निगरानी की जा रही है।

नेपाल का पानी भारत के लिए क्यों बढ़ा सकता है खतरा?

नेपाल की नदियों का नेटवर्क भारत की नदियों से सीधे जुड़ा हुआ है। नेपाल में भोटेकोशी नदी त्रिशूली नदी प्रणाली से जुड़ती है। आगे त्रिशूली और काली गंडकी के संगम से नारायणी नदी बनती है, जो भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक के नाम से बहती है।

ऐसे में नेपाल के ऊपरी इलाकों में अचानक पानी बढ़ने पर उसका असर बिहार और उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में दिखाई दे सकता है। फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता गंडक-नारायणी नदी प्रणाली में तेजी से बढ़ते जलस्तर को लेकर है।

उत्तराखंड में शारदा नदी पर नजर

नेपाल में बाढ़ के बाद उत्तराखंड के चंपावत जिले में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। SDRF की टनकपुर पोस्ट को हाई अलर्ट पर रखा गया है। टीम शारदा घाट, शारदा बैराज और आसपास के संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही है।

SDRF जवान स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर नदी के जलस्तर और संभावित खतरे पर नजर रख रहे हैं। स्थानीय लोगों, यात्रियों और मछुआरों से नदी के किनारे जाने से बचने की अपील की गई है।

पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह ने ली स्थिति की जानकारी

नेपाल में बाढ़ से पैदा हुए हालात पर केंद्र सरकार भी नजर रख रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात कर दोनों राज्यों में संभावित बाढ़ की स्थिति और तैयारियों की जानकारी ली।

केंद्र की ओर से राज्यों को हरसंभव मदद और आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तराखंड ने जारी की हेल्पलाइन

नेपाल में फंसे उत्तराखंड के लोगों या उनके परिजनों की सहायता के लिए राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के नंबर जारी किए गए हैं।

SEOC हेल्पलाइन:
0135-2710334, 0135-2710335, 0135-2664314, 0135-2664315, 0135-2664316, 8218867005

टोल फ्री: 1070

अगले 24 घंटे बेहद अहम

नेपाल में हुई तबाही के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में अगले 24 घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। प्रशासन नदियों के जलस्तर के साथ नेपाल से आने वाले पानी की स्थिति पर नजर रख रहा है।

फिलहाल बिहार, यूपी और उत्तराखंड में एहतियाती कदम उठाए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने, नदी और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखने तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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