ईरान से जंग में घटा अमेरिका का मिसाइल स्टॉक? ATACMS और PrSM के भंडार पर उठे सवाल, ट्रंप प्रशासन ने दावे खारिज किए

नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के बीच अमेरिका के अत्याधुनिक मिसाइल भंडार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना ने ATACMS और PrSM जैसी लंबी दूरी की सटीक मारक मिसाइलों के अपने परिचालन भंडार का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। हालांकि, पेंटागन ने मिसाइलों की वास्तविक बची हुई संख्या सार्वजनिक नहीं की है और ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी हथियार क्षमता को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज किया है।

ATACMS और PrSM का स्टॉक घटने का दावा

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना के आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) और नई पीढ़ी की प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) का परिचालन भंडार तेजी से घटा है। दावा किया जा रहा है कि इन मिसाइलों का लगभग पूरा उपलब्ध स्टॉक अभियान में इस्तेमाल हो चुका है।

बताया गया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड को अभियान जारी रखने के लिए दूसरे क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी सैन्य भंडारों से भी मिसाइलें मंगानी पड़ीं। हालांकि, इन दावों की सटीक पुष्टि के लिए अमेरिका ने मिसाइलों की मौजूदा संख्या सार्वजनिक नहीं की है।

THAAD और Patriot इंटरसेप्टर पर भी दबाव

रिपोर्टों में सिर्फ आक्रामक मिसाइलों के भंडार में कमी की बात नहीं कही गई है, बल्कि अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली पर भी दबाव का दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अभियान के दौरान अमेरिका ने THAAD इंटरसेप्टरों का बड़ा हिस्सा और Patriot इंटरसेप्टरों की भी काफी संख्या इस्तेमाल की है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुमानों का हवाला देते हुए अमेरिकी मिसाइल रक्षा क्षमता पर दबाव की बात कही जा रही है।

अमेरिकी नौसेना और अन्य बलों के Tomahawk क्रूज मिसाइल भंडार के इस्तेमाल को लेकर भी इसी तरह के दावे सामने आए हैं।

चीन के खिलाफ रणनीति को लेकर चिंता

अमेरिका के लिए चिंता इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि लंबी दूरी की सटीक मारक मिसाइलें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

चीन के पास मजबूत और बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली होने के कारण अमेरिकी सेना के लिए लंबी दूरी से हमला करने वाली मिसाइलें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे में यदि किसी लंबे संघर्ष के दौरान इन हथियारों का भंडार तेजी से कम होता है, तो भविष्य में किसी बड़े सैन्य संकट की स्थिति में अमेरिका की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।

लंबा युद्ध चला तो बढ़ सकती है परेशानी

मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की स्थिति में हथियारों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई है। ईरान के खिलाफ अभियान में लंबी दूरी की मिसाइलों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दिए जाने से मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है।

इस रणनीति का एक प्रमुख उद्देश्य अमेरिकी लड़ाकू विमानों और उनके पायलटों को जोखिम से बचाना भी बताया जाता है। लेकिन इसके चलते महंगी और सीमित संख्या में उपलब्ध सटीक मारक मिसाइलों की खपत तेज हो सकती है।

रक्षा कंपनियां बढ़ा रहीं उत्पादन

अमेरिकी रक्षा उद्योग मिसाइलों के उत्पादन में तेजी लाने की कोशिश कर रहा है। Lockheed Martin ATACMS के स्थान पर विकसित की जा रही PrSM मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रही है।

हालांकि PrSM अपेक्षाकृत नई प्रणाली है और इसके उत्पादन की क्षमता अभी सीमित है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, उच्च तीव्रता वाले लंबे युद्ध में इस्तेमाल हुए हथियारों की भरपाई करना केवल उत्पादन बढ़ाने से तत्काल संभव नहीं होता। इसके लिए कच्चे माल, उत्पादन क्षमता और पूरी सप्लाई चेन को लंबे समय तक सक्रिय रखना पड़ता है।

ट्रंप प्रशासन ने हथियारों की कमी के दावे को नकारा

वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन ने अमेरिकी हथियार भंडार को लेकर सामने आ रही चिंताओं को खारिज किया है।

ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के पास किसी भी अन्य देश की तुलना में बड़ी सैन्य क्षमता और पर्याप्त हथियार मौजूद हैं। पेंटागन और व्हाइट हाउस की ओर से भी कहा गया है कि अमेरिकी सेना राष्ट्रपति के रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता रखती है।

इस तरह एक तरफ अमेरिकी हथियार भंडार पर दबाव को लेकर मीडिया रिपोर्टें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी प्रशासन इसे गंभीर कमी मानने से इनकार कर रहा है।

ईरान संकट में कूटनीतिक हलचल भी तेज

सैन्य तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ट्रंप ने दोनों देशों के बीच बातचीत होने की बात कही है, जबकि ईरान की ओर से ऐसे दावों का खंडन किया गया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी कूटनीतिक प्रयासों की खबरें हैं। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके आसपास तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार तथा वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।

आधुनिक युद्ध ने दिखाई हथियार उत्पादन की अहमियत

ईरान संघर्ष से जुड़ी इन रिपोर्टों ने आधुनिक युद्ध में हथियारों के उत्पादन और सप्लाई चेन की अहमियत को फिर सामने ला दिया है। किसी देश के पास अत्याधुनिक हथियार होना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी यह भी है कि युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों को कितनी तेजी से दोबारा बनाया और मोर्चे तक पहुंचाया जा सकता है।

अगर अमेरिकी मिसाइल भंडार को लेकर सामने आए दावे सही साबित होते हैं, तो इसका असर केवल ईरान अभियान तक सीमित नहीं रहेगा। चीन जैसे संभावित प्रतिद्वंद्वी के साथ भविष्य के संघर्ष में अमेरिकी सैन्य तैयारी और वैश्विक स्तर पर एक साथ कई मोर्चों को संभालने की क्षमता पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल, मिसाइलों के वास्तविक बचे हुए स्टॉक का आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अमेरिकी हथियार भंडार के 'लगभग खत्म' होने के दावे को फिलहाल मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों पर आधारित दावा ही माना जाना चाहिए।

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