NSA कानून फिर चर्चा में, दिल्ली पुलिस को मिला हिरासत का अधिकार

इंदिरा गांधी सरकार के समय 1980 में बना था राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, प्रदर्शन के बीच बढ़ी बहस

नई दिल्ली, 24 जुलाई। दिल्ली में जारी प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को NSA की धारा 3(2) के तहत लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार दिया है। यह अधिकार 18 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह कोई नया निर्णय नहीं है। दिल्ली में यह अधिकार पिछले कई वर्षों से नियमित प्रक्रिया के तहत समय-समय पर दिया जाता रहा है। लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच इस आदेश के सामने आने से कानून को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।

क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)?

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी नेशनल सिक्योरिटी एक्ट वर्ष 1980 में लागू किया गया था। यह एक निवारक हिरासत (Preventive Detention) कानून है। इसके तहत किसी व्यक्ति को अपराध करने के बाद नहीं, बल्कि प्रशासन को संभावित खतरे की आशंका होने पर पहले ही हिरासत में लिया जा सकता है।

यदि सरकार या प्रशासन को लगता है कि किसी व्यक्ति की गतिविधियां देश की सुरक्षा, राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति के लिए खतरा बन सकती हैं, तो उसके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सामान्य गिरफ्तारी से अलग है NSA

सामान्य आपराधिक मामलों में पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है और आरोपी को कानूनी सहायता का अधिकार मिलता है। वहीं NSA के तहत हिरासत का आधार संभावित खतरा होता है, न कि किसी अपराध का साबित होना।

इस कानून के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को कारण बताने में कुछ समय की अनुमति होती है। प्रशासन कुछ परिस्थितियों में कारण बताने की अवधि बढ़ा सकता है। यही प्रावधान इसे विवादित बनाता है।

किन परिस्थितियों में लगाया जा सकता है NSA?

NSA की धारा 3 के तहत कार्रवाई तब की जा सकती है, जब प्रशासन को लगे कि किसी व्यक्ति की गतिविधियां—

  • देश की सुरक्षा या रक्षा के लिए खतरा हैं।
  • भारत के विदेशी संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
  • राज्य की सुरक्षा प्रभावित कर सकती हैं।
  • सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ सकती हैं।
  • आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति बाधित कर सकती हैं।

दिल्ली पुलिस को कैसे मिला अधिकार?

NSA की धारा 3(2) के तहत राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त को हिरासत आदेश जारी करने का अधिकार दे सकती है। दिल्ली में यही अधिकार पुलिस आयुक्त को दिया गया है।

हालांकि, पुलिस आयुक्त द्वारा जारी आदेश को सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है। तय समय में मंजूरी नहीं मिलने पर आदेश प्रभावहीन हो सकता है।

कितने समय तक हो सकती है हिरासत?

NSA के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। हालांकि, सरकार परिस्थितियों की समीक्षा कर इससे पहले भी हिरासत समाप्त कर सकती है।

हिरासत के मामलों की समीक्षा के लिए एडवाइजरी बोर्ड का प्रावधान है। इसमें ऐसे सदस्य होते हैं जो हाईकोर्ट के न्यायाधीश हैं, रह चुके हैं या बनने की योग्यता रखते हैं। सरकार को निर्धारित समय के भीतर मामला बोर्ड के सामने रखना होता है। यदि बोर्ड हिरासत को उचित नहीं मानता है, तो व्यक्ति को रिहा करना पड़ता है।

मुख्य बिंदु

  • दिल्ली पुलिस को NSA के तहत हिरासत का अधिकार मिला।
  • NSA वर्ष 1980 में लागू किया गया था।
  • यह अपराध के बाद नहीं, संभावित खतरे की आशंका पर कार्रवाई की अनुमति देता है।
  • अधिकतम 12 महीने तक हिरासत का प्रावधान।
  • कानून को लेकर सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन पर बहस जारी है।

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