मानसून में गन्ना फसल को रोगों से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी, किसानों को नियमित निरीक्षण की सलाह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने मानसून के दौरान गन्ना फसल में रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने किसानों से फसल का नियमित निरीक्षण करने, रोगों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत वैज्ञानिक उपाय अपनाने तथा आवश्यक होने पर स्थानीय गन्ना विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।
गन्ना आयुक्त ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में जारी इस एडवाइजरी का उद्देश्य मानसून के दौरान बढ़ी आर्द्रता के कारण गन्ना फसल में होने वाले रोगों से किसानों को बचाना है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा जारी सलाह में लाल सड़न (रेड रॉट), पोक्का बोइंग, बैक्टीरियल टॉप रॉट और मुरझा (विल्ट) जैसे प्रमुख रोगों के लक्षण और उनके नियंत्रण के उपाय विस्तार से बताए गए हैं।
विभाग के अनुसार गन्ने की प्रमुख किस्म को. 0238 और को. 05011 में यदि लाल सड़न रोग के लक्षण दिखाई दें तो संक्रमित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर नष्ट कर दें। साथ ही वैज्ञानिक सलाह के अनुसार अनुशंसित फफूंदनाशियों का प्रयोग करें। किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि संक्रमित खेतों का पानी अन्य खेतों में न जाने दें तथा खेतों में जल निकासी और सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त रखें, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
यदि फसल में पोक्का बोइंग रोग के लक्षण दिखाई दें तो 15 दिन के अंतराल पर दो बार कॉपर ऑक्सीक्लोराइड अथवा कार्बेन्डाजिम के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। समय पर उपचार से रोग के प्रभाव को कम कर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन सुरक्षित रखा जा सकता है।
मुरझा (विल्ट) रोग की रोकथाम के लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने के साथ सल्फर, जिंक सल्फेट और बोरेक्स का संतुलित एवं अनुशंसित मात्रा में प्रयोग करने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि संतुलित पोषण से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण की आशंका कम होती है।
गन्ना विभाग ने किसानों से रासायनिक उपायों के साथ जैव कीटनाशकों (बायो पेस्टीसाइड) के उपयोग पर भी जोर दिया है, ताकि पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल सके।
विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि गन्ना फसल में रोगों का प्रकोप अधिक दिखाई दे या संक्रमण तेजी से फैल रहा हो, तो तत्काल स्थानीय गन्ना विभाग के अधिकारियों अथवा कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर वैज्ञानिक परामर्श प्राप्त करें। नियमित फसल निरीक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर गन्ना उत्पादन, गुणवत्ता और किसानों की आय को सुरक्षित रखा जा सकता है।


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