रालोद नेता आदित्य पंवार की मौत, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विजय राणा गंभीर
मेरठ। खरखौदा थाना क्षेत्र में देर रात एक भीषण सड़क हादसे में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) छात्र सभा के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष आदित्य पंवार (35) की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विजय सिंह राणा गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए गढ़ रोड स्थित न्यूटिमा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। हादसे की खबर मिलते ही रालोद कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं में शोक की लहर दौड़ गई।
प्रयागराज से लौटते समय हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, आदित्य पंवार, विजय राणा और उनका एक अन्य साथी अपनी एक्सयूवी-700 (XUV-700) कार से प्रयागराज से मेरठ लौट रहे थे। देर रात जैसे ही उनकी कार खरखौदा क्षेत्र में खड़खड़ी टोल प्लाजा से कुछ आगे बढ़ी, अचानक अनियंत्रित हो गई। कार रफ्तार में डिवाइडर को तोड़ते हुए बिजली के खंभे से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी को कार से निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने आदित्य पंवार को मृत घोषित कर दिया।
चालक को झपकी आने की आशंका
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच और घटनास्थल के निरीक्षण से यह साफ है कि कार को किसी दूसरे वाहन ने टक्कर नहीं मारी है। आशंका जताई जा रही है कि देर रात होने के कारण चालक को अचानक झपकी आ गई, जिससे गाड़ी बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। पुलिस तकनीकी खराबी समेत अन्य सभी पहलुओं की भी गहनता से जांच कर रही है।
शामली रवाना किया गया शव: कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सोमवार को दिवंगत रालोद नेता आदित्य पंवार के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक जिला शामली स्थित गांव भेज दिया गया है। अस्पताल में विजय राणा के परिजनों को ढांढस बंधाने के लिए रालोद और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं का तांता लगा रहा।
छात्र राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति
आदित्य पंवार और विजय सिंह राणा पिछले करीब 15 वर्षों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की छात्र राजनीति और रालोद में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। दोनों ने युवाओं और छात्रों के हक के लिए कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया था। रालोद के मेरठ जिलाध्यक्ष सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं और पूर्व छात्र संघ पदाधिकारियों ने आदित्य के आकस्मिक निधन को संगठन और युवा राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।


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