50 साल में पहली बार लबालब भरे सावटू के दोनों 

तालाब हिंडन नदी के उफान से डूबीं फसलें, 30 किसान परिवारों पर मंडराया संकट

—सावटू मार्ग हुआ बाधित, खेतों में भरा पानी, किसानों का आरोप—अब तक नहीं पहुंचा कोई जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी, राहत और जलनिकासी की उठाई मांग

मुजफ्फरनगर। जनपद के भोराकलां क्षेत्र स्थित गांव सावटू में लगातार हो रही बारिश और हिंडन नदी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। भारी वर्षा के चलते गांव के दोनों तालाब पहली बार पूरी तरह लबालब भर गए और उनका पानी सड़कों तथा खेतों में फैल गया। वहीं खादर क्षेत्र से होकर बहने वाली हिंडन नदी के उफान और सिसौली व खेड़ी सूंडियान की ओर से आ रहे पानी ने सैकड़ों बीघा कृषि भूमि को जलमग्न कर दिया, जिससे किसानों की खड़ी फसल और हरे चारे को भारी नुकसान पहुंचा है।

ग्रामीणों के अनुसार सिसौली–सावटू मार्ग पर भी पानी भर जाने से आवागमन प्रभावित हो गया है। कई स्थानों पर सड़क पानी में डूब गई है, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

"50 साल में पहली बार ऐसा मंजर देखा"

सावटू निवासी किसान अमित बालियान ने बताया कि पिछले करीब 50 वर्षों में पहली बार गांव के दोनों तालाब पूरी तरह भरकर बाहर निकल आए हैं। उन्होंने बताया कि सिसौली और सावटू के बीच स्थित दोनों तालाबों के पास ही हिंडन नदी बहती है। लगातार बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर के कारण तालाब ओवरफ्लो हो गए, जिससे पानी खेतों और सड़क पर फैल गया।

उनका कहना है कि सिसौली क्षेत्र के खेतों का पानी भी लगातार सावटू की ओर आ रहा है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने के कारण फसलें खराब होने लगी हैं।

कई किसानों की फसल बर्बाद, 30 परिवारों पर संकट

ग्रामीणों के अनुसार इस जलभराव से असिंदर पूर्व प्रधान, संजय सिंह, डॉ. अनिल, सुनील सिंह, सन्नी, विपुल, भूरा, उपेंद्र, मित्रपाल सहित अनेक किसानों की खेती पानी में डूब गई है। खेतों में खड़ी फसल और हरा चारा बर्बाद होने से करीब 30 किसान परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो नुकसान और बढ़ सकता है तथा आने वाली फसल की तैयारी भी प्रभावित होगी।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नाराजगी

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद अब तक न तो कोई जनप्रतिनिधि गांव पहुंचा है और न ही किसी प्रशासनिक अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया है। किसानों का कहना है कि वे लगातार राहत और जलनिकासी की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

जलनिकासी और मुआवजे की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल गांव का सर्वे कराने, खेतों से पानी निकालने के लिए प्रभावी व्यवस्था करने तथा फसलों के नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत कार्य शुरू नहीं हुआ तो किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो जाएगी।

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