मेरठ में गरमाई सियासत:
ललिता हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस डेलिगेशन को टोल प्लाजा पर रोका, तीखी बहस
मेरठ। रोहटा थाना क्षेत्र में हुए दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर मेरठ में सियासी पारा गरमा गया है। सोमवार दोपहर पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस के सांसदों और विधायकों के प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) को पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर ही रोक लिया। इस दौरान कांग्रेसी नेताओं और पुलिस के बीच करीब दो घंटे तक तीखी नोकझोंक और बहस हुई। कानून-व्यवस्था का हवाला देकर आगे बढ़ने से रोके जाने से नाराज कांग्रेसियों ने 27 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन का ऐलान किया है।
काशी टोल प्लाजा छावनी में तब्दील, कमरे में बिठाए गए नेता
सोमवार दोपहर करीब 11:00 बजे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा काफिला 15-20 गाड़ियों से दिल्ली से मेरठ के लिए रवाना हुआ था। हालांकि, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर करीब 100 जवानों को तैनात कर किलेबंदी कर रखी थी। दोपहर 12:00 बजे जैसे ही डेलिगेशन वहां पहुंचा, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। हालात बेकाबू होते देख एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने डेलिगेशन को टोल प्लाजा के एक कमरे में बैठा दिया। करीब दो घंटे तक मान-मनौव्वल और हंगामे के बाद डेलिगेशन दोपहर 2:00 बजे वापस लौट गया।
इमरान मसूद बोले– ₹1 करोड़ मुआवजा दें और एसएसपी को सस्पेंड करें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस दौरान पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा,
"यह बेहद दुखद घटना है, लेकिन पुलिस की बाद की कार्रवाई पूरी तरह गलत तस्वीर पेश कर रही है। हमारी मांग है कि पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही, कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने के आरोपी एसएसपी अविनाश पांडेय को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए।"
डेलिगेशन में शामिल सांसद तनुज पुनिया और यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
एसपी सिटी बोले– साक्ष्यों के साथ पूरी स्थिति स्पष्ट की गई
दूसरी ओर, एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि कांग्रेस डेलिगेशन के साथ बेहद शांतिपूर्ण और तथ्यात्मक माहौल में बातचीत की गई है। उन्होंने कहा, "नेताओं ने अपनी मांगें रखी थीं, जिसके जवाब में उन्हें अब तक हुई पुलिसिया विवेचना और जुटाए गए साक्ष्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। कलेक्ट्रेट के बाहर हुए हंगामे को लेकर भी साक्ष्यों के साथ बात रखी गई। डेलिगेशन को जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने का अनुरोध किया गया था, जिसके बाद वे दोपहर 2:00 बजे वापस लौट गए।"
भाकियू तोमर भी उतरी मैदान में, एडीजी दफ्तर पर की पंचायत
इस बीच, छात्रा हत्याकांड को लेकर किसानों और सामाजिक संगठनों का गुस्सा भी फूट पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन (तोमर) ने छात्रा को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को एडीजी कार्यालय पर एक बड़ी पंचायत आयोजित करने की घोषणा की है, जिससे प्रशासनिक अमला अलर्ट पर है।
यह था पूरा मामला (बैकग्राउंड)
15 मई: टीपीनगर निवासी बीए तृतीय वर्ष की छात्रा ललिता गौतम परीक्षा देने निकली, पर घर नहीं लौटी।
17 मई: रोहटा के उकसिया गांव में गन्ने के खेत से ललिता का शव बरामद हुआ। परिजनों ने गैंगरेप और हत्या का आरोप लगाया।
पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश समेत अन्य को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि अंकुश को छात्रा पर किसी और से बात करने का शक था, जिसके चलते उसने साथियों संग मिलकर हत्या की।
8 जुलाई: इंसाफ की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर रहे परिजनों व लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें एसएसपी पर भी प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी के आरोप लगे।



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