सिफ़ारिश के गुण बहुत हैं...!
- ललिता जोशी
सिफ़ारिश का अर्थ तो हम सभी जानते हैं । कभी किसी को अपना कोई आउट ऑफ द वे करवाना हो या किसी मंदिर की या फिर डॉक्टर को दिखाने की लाइन में अपने नंबर से पहले जाने के लिए सिफ़ारिश । सिफ़ारिश का सीधा -सादा मतलब है किसी अच्छी बात के लिए दूसरों को प्रेरित करना । जैसे की किसी स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई अच्छी है तो उसके लिए औरों को प्रेरित करना । ऐसे ही यदि कोई प्रॉडक्ट अच्छा हो तो दूसरों को उसे खरीदने या ट्राई करने के लिए सिफ़ारिश करना ।
मगर अब ये सिफ़ारिश का दायरा बढ़ता ही जा रहा है । अब तो मनुष्य भगवान से सिफ़ारिश करता है ,अपने मनोवांछित कार्य के लिए । भगवान तक तो ठीक है । अब हमारी मनोवृत्ति ऐसी होती जा रही है कि हर छोटी -बड़ी बात में हम अप्रोच या सिफ़ारिश लगाते हैं जैसे वो हमारे जीवन का ऑक्सीज़न हो । मानो जीवन में सिफ़ारिश लगवाना मल्टीविटामिन की वो गोली है जिसे खाने के जीवन में ऊर्जा और गति आ जाती है । इस सिफ़ारिश के हम सभी साक्षी हैं ।
वैसे तो ये सिफ़ारिशों का दौर बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है जब पूरा परिवार ईश्वर से सिफ़ारिश करता है कि उन्हें पुत्र रत्न हो, फिर शुरू होता बच्चे के शिक्षा की शुरूआत का दौर और अच्छे स्कूलों में एडमिशन के लिए सिफ़ारिशें, अच्छे कालेजों में एडमिशन के लिए सिफ़ारिशें, नौकरियों के लिए सिफ़ारिश, अस्पतालों में मरीज डॉक्टरों को दिखाने के लिये सिफ़ारिश करवाते हैं और मंदिरों में भगवान के दर्शनों के लिए सिफ़ारिश, अपने कामों को करवाने के लिए सिफ़ारिशें ।
सिफ़ारिश तो ऐसी बला है जिससे कोई भी अछूता नहीं है । इसके प्रति सब आकृष्ट होते हैं । इतना ही लोग समाज के प्रभावशाली लोगों से सिफ़ारिश यानि अनुशन्सा पत्र लेकर भी अपने काम करवाते हैं । अक्सर राजनेताओं के यहाँ लगने वाले जनता दरबार में भी आम जनता अपने कामों के लिए अपने तथाकथित जनसेवकों से सिफ़ारिश लगवाती है।
भई जीवन में सिफ़ारिश लगवाना और लगाना चाटमसाले का काम करता है और जीवन में स्वाद भर देता है । ये ऐसा स्वाद है जिससे लोग अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए द्विगुणित गति प्राप्त करते हैं । सिफ़ारिश यानि विटामिन ‘सि’। जिस किसी भी को ये पावर मिल जाए वो सर्वशक्तिमान बन जाता है । अगर ये सिफ़ारिश सही जगह और सही व्यक्ति के पास पहुँच जाये तो वो शब्दभेदी बाण की तरह लक्ष्य का संधान करके ही वापस लौटता है ।
आमजन से खासजन तक अधिकांश की चाहत है ये सिफ़ारिश । सभी को चाहत है सिफ़ारिश की जिसके पास सिफ़ारिश नहीं है वो सभी आहत हैं । ये ऐसी सुंदरी है जिसका सानिध्य सभी चाहते हैं । वैसे एक बात है पहले तो सिफ़ारिश निस्वार्थ भाव से लोक कल्याण के लिए की जाती थी । आजकल सिफ़ारिश का स्वरूप तो वही है लेकिन उद्देश्य केवल अपने स्वार्थ के लिए रह गया है । जिस तरह से गलाकाट प्रतिस्पर्धा चल रही है उसमें तो हम में से अधिकांश लोग स्वहित के लिए सिफ़ारिश लगवाते हैं। चाहे उसकी कीमत किसी और को अदा करनी पड़े लेकिन अपना काम सबसे पहले होना चाहिए । अगर कोई रसूखदार परिवार से है तो उसकी जायज और नाजायज मांगों के लिए पूरा तंत्र उसकी सिफ़ारिश करता है ।
ये सब अब आम लोगों के लिए आम बात होती जा रही है । बस अपना काम बनना चाहिए बाकी जाए भाड़ में। वैसे तो सिफ़ारिश से कोई भी नहीं बचा है यहाँ तक कि कवि और शायर भी---
चाँद सिफ़ारिश जो करता हमारी
देता वो तुम को बता
शर्म -ओ -हया के पर्दे गिरा के
करनी है हम को खता
जिद है अब तो है खुद को मिटाना...
सिफ़ारिश कि बारिश का मज़ा सभी लेना चाहता है । ये चीज है ही ऐसी (मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)





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