भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ को मिली मंजूरी

 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लिए होगी उपलब्ध

नोएडा, 21 जुलाई। टाकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने घोषणा की है कि भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में डेंगू की रोकथाम के लिए कंपनी की वैक्सीन क्यूडेंगा (Qdenga) को बाजार में उतारने की मंजूरी दे दी है। कंपनी के अनुसार, यह भारत में स्वीकृत होने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है, जिसे पहले डेंगू संक्रमण हो चुका हो या नहीं, दोनों ही परिस्थितियों में लगाया जा सकता है और टीकाकरण से पहले किसी विशेष जांच की आवश्यकता नहीं होती।

कंपनी ने बताया कि यह मंजूरी न्यू ड्रग्स एंड क्लीनिकल ट्रायल्स नियम, 2019 के तहत प्रदान की गई है। क्यूडेंगा एक टेट्रावैलेंट (चारों डेंगू सीरोटाइप के विरुद्ध) जीवित लेकिन कमजोर किए गए वायरस पर आधारित वैक्सीन है। इसे दो खुराकों में लगाया जाता है, जिनके बीच तीन महीने का अंतर रखा जाता है।

टाकेडा के इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट्स प्रमुख डॉ. महेंद्र नायक ने कहा कि भारत में डेंगू लगातार एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। उन्होंने बताया कि सात वर्षों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार क्यूडेंगा डेंगू संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम के विरुद्ध दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती है तथा डेंगू वायरस के सभी चारों सीरोटाइप के खिलाफ प्रभावी है।

कंपनी के अनुसार, वर्ष 2022 में वैश्विक स्तर पर लॉन्च होने के बाद इस वैक्सीन को अब तक 43 देशों में नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है और इसकी 3.2 करोड़ से अधिक डोज वितरित की जा चुकी हैं। ब्राजील, अर्जेंटीना, कोलंबिया और इंडोनेशिया सहित कई देशों के सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रमों में भी इसे शामिल किया गया है।

टाकेडा के अधिकारियों ने बताया कि भारत में मंजूरी वैश्विक क्लीनिकल विकास कार्यक्रम और भारतीय प्रतिभागियों पर किए गए फेज-3 अध्ययन के परिणामों के आधार पर दी गई है। वैश्विक स्तर पर 28,000 से अधिक प्रतिभागियों पर किए गए परीक्षणों में वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया। कंपनी के अनुसार, अध्ययन में दूसरी खुराक के 12 महीने बाद डेंगू संक्रमण के विरुद्ध 80.2 प्रतिशत तथा अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करने में 90.4 प्रतिशत प्रभावशीलता दर्ज की गई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी डेंगू-प्रभावित क्षेत्रों में इस वैक्सीन के उपयोग की सिफारिश कर चुका है। कंपनी के अनुसार, क्यूडेंगा को डब्ल्यूएचओ प्रीक्वालिफिकेशन भी प्राप्त है, जिससे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इसके क्रय एवं वितरण की प्रक्रिया में इसे शामिल कर सकती हैं।

टाकेडा ने कहा कि डीसीजीआई से मंजूरी मिलने के बाद वह भारतीय नियामक संस्थाओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर देश में वैक्सीन की उपलब्धता और वितरण की दिशा में कार्य करेगी।

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