राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग
निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, फॉरेंसिक ऑडिट और पारदर्शिता की उठाई मांग
ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व, सार्वजनिक ट्रस्ट का दर्जा और ट्रस्टी बोर्ड के पुनर्गठन की अपील
नई दिल्ली, 18 जुलाई। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग को लेकर निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अखाड़े ने ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित करने, उसके सभी वित्तीय और संपत्ति संबंधी लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने तथा ट्रस्ट के कामकाज में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
श्री पंच रामानंदी निर्मोही अखाड़ा की ओर से महंत राजा रामचंद्राचार्य अतीत गुरु महंत रघुनाथ दासजी महाराज के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2019 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की भावना के अनुरूप ट्रस्ट का गठन और संचालन नहीं किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान ट्रस्ट पर्याप्त वैधानिक निगरानी और जवाबदेही के अभाव में प्रभावी रूप से एक "निजी ट्रस्ट" की तरह कार्य कर रहा है।
याचिका में कहा गया है कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े आर्थिक मामलों में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट की आय-व्यय, दान राशि तथा अन्य वित्तीय लेन-देन का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाना आवश्यक है। अखाड़े का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
निर्मोही अखाड़े ने यह भी दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2019 के फैसले में मंदिर प्रबंधन में अखाड़े को उचित भूमिका और प्रतिनिधित्व दिए जाने की बात कही थी, लेकिन अब तक उस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि केंद्र सरकार को ट्रस्ट डीड में आवश्यक संशोधन करने तथा ट्रस्टी बोर्ड का पुनर्गठन करने का निर्देश दिया जाए। अखाड़े ने सुझाव दिया है कि नए बोर्ड में रामानंदी बैरागी संप्रदाय के सदस्यों की एक पर्यवेक्षी समिति को शामिल किया जाए और ऐसे व्यक्तियों को ट्रस्टी बनाया जाए, जिनकी सत्यनिष्ठा निर्विवाद हो तथा जिनका श्री राम जन्मभूमि और रामानंदी परंपरा से ऐतिहासिक, कानूनी या धार्मिक संबंध रहा हो।अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और निर्णय तय होगा।


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