धर्मशाला में अतिक्रमण विवाद गहराया
सरकारी जमीन पर भाजपा-कांग्रेस के पार्षदों का कब्जा!
जांच में बड़ा खुलासा, अब होगी कार्रवाई
प्रशासन ने संबंधित मामलों में अतिक्रमण हटाने और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के नगर निगम धर्मशाला में मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के बाद अब सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला सियासी विवाद का केंद्र बन गया है। पहले भाजपा के कुछ पार्षदों पर सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप लगे थे और अब कांग्रेस के पार्षद भी जांच के दायरे में आ गए हैं। जिला प्रशासन ने साफ किया है कि जहां भी शिकायतें मिली हैं, वहां नियमानुसार जांच और कार्रवाई की जा रही है।
कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के तुरंत बाद भाजपा के तीन वार्ड पार्षदों और उनके कानूनी वारिसों के खिलाफ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों की जांच एसडीएम के माध्यम से करवाई गई। प्रारंभिक जांच में अतिक्रमण के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। इसके बाद संबंधित मामलों में अतिक्रमण हटाने और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने इन मामलों की रिपोर्ट शहरी विकास विभाग को भी भेज दी है।
अब कांग्रेस पार्षदों पर लगे आरोप
उपायुक्त ने बताया कि भाजपा मंडल धर्मशाला के अध्यक्ष डॉ. विशाल नेहरिया की ओर से कांग्रेस के तीन नवनिर्वाचित पार्षदों और एक पूर्व प्रत्याशी सहित अन्य लोगों के खिलाफ भी शिकायतें दी गई हैं। शिकायत में वार्ड-4 से कांग्रेस पार्षद एवं पूर्व मेयर नीनू शर्मा, वार्ड-11 से अनुराग धीमान, वार्ड-14 से आनोज विष्ट और वार्ड-17 से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश पप्पी पर सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा पूर्व मेयर रजनी व्यास और ओंकार सिंह नेहरिया के मामलों में भी कानूनी राय ली जा रही है।
सदस्यता पर भी पड़ सकता है असर
पार्षदों की सदस्यता रद्द होने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में उपायुक्त ने कहा कि कानून इस विषय में स्पष्ट है। यदि सक्षम प्राधिकारी अपनी जांच में यह पाता है कि संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधि अधिनियम की धारा-8 के तहत अयोग्यता की श्रेणी में आते हैं, तो उसी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक समीकरण भी हो सकते हैं प्रभावित
नगर निगम धर्मशाला के 17 सदस्यीय सदन में भाजपा के पास 11, कांग्रेस के पास 5 और एक निर्दलीय पार्षद है। ऐसे में अतिक्रमण से जुड़े मामलों की जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई का असर नगर निगम की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों में अंतिम निर्णय केवल जांच रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के प्रावधानों के आधार पर ही लिया जाएगा।
भाजपा की ओर से शिकायत पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार के शहरी विकास विभाग, राजस्व विभाग और एसडीएम धर्मशाला कार्यालय को भी भेजी गई है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और सक्षम प्राधिकारी के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धर्मशाला की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर चुका है।


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